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इस्कॉन मंदिर में पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य, संतों ने की शालीन कपड़े पहनने की अपील

दिल्ली इस्कॉन के ट्रस्टी और कंट्री डायरेक्टर ऑफ कम्युनिकेशंस युधिष्ठिर गोविंदा दास ने भी इस पर अपनी राय रखी। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में साफ किया कि ये ड्रेस कोड महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए है।
उन्होंने कहा, "यह ड्रेस कोड सिर्फ महिलाओं और पुरुषों दोनों पर लागू होता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब भी हम किसी मंदिर या पवित्र जगह पर जाते हैं, तो हम भगवान के प्रति भक्ति, विश्वास और समर्पण की भावना के साथ आते हैं। इसलिए हर जगह की अपनी पवित्रता और मर्यादा होती है। यह सिर्फ इस्कॉन तक ही सीमित नहीं है। आप त्रिवेंद्रम में अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुपति में भगवान बालाजी मंदिर, या जगन्नाथ पुरी जाते हैं तो वहां भी ऐसा ही होता है।
उन्होंने कहा, "अगर आप किसी भी आध्यात्मिक स्थान पर जाएंगे, वहां व्यक्ति भगवान की पूजा में लीन होते हैं और अपने आप को भगवान के प्रति आत्मसमर्पित समर्पित करते हैं। ये सिर्फ मंदिर, गिरजाघर, या मस्जिद तक नहीं, आप देख सकते है कि ऑफिस, हॉस्पिटल, या फिर किसी फोर्स में अपना ड्रेस कोड होता है। हर जगह का अपना एक अलग महत्व है, बस हम उसका ही सम्मान करने के लिए बोल रहे हैं।"
--आईएएनएस
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