Tirthankara Bhagwan possesses intellect, shruta, and avadhi knowledge from birth: Acharya Vardhaman Sagar-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Dec 12, 2025 3:10 am
Location
 
   राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

तीर्थंकर भगवान जन्म से मति, श्रुत ओर अवधि ज्ञान के धारी होते है : आचार्य वर्धमान सागर

khaskhabar.com: सोमवार, 10 नवम्बर 2025 7:13 PM (IST)
तीर्थंकर भगवान जन्म से मति, श्रुत ओर अवधि ज्ञान के धारी होते है : आचार्य वर्धमान सागर
श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव : राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार का भी मंचन टोंक। पंचकल्याणक महामहोत्सव का आज चौथा तप कल्याणक दिवस है। आप भगवान के वैराग्य के दृश्य देख रहे है, भगवान के जीव और कमठ के जीव में 10 वर्षों तक कमठ के जीव ने उपसर्ग किया और पार्श्वनाथ भगवान के जीव ने समता से कष्टों को सहन किया। मोह कषाय के कारण संसार में भ्रमण होता है, मोह में आकंठ डूबे रहने कारण सुख और शांति नहीं है। भगवान पार्श्वनाथ का जन्म ओर दीक्षा दिवस समान है, 100 वर्ष के जीवन में 30 वर्ष की उम्र में जाती स्मरण कारण दीक्षा लेकर मुनि हुए। 3 दिनों से आपने अत्यंत हर्ष और आनंद के साथ कार्यक्रमों का लाभ लिया। पुण्य और पाप में संसार लिप्त है, अच्छे कार्यों से पुण्य का उपार्जन होता है। तीर्थंकर बालक 16 कारण भावना और 12 भावना के चिंतन के बल पर संसार में अवतरित हुए हैं, क्योंकि उन्होंने तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध किया। तीर्थंकर बालक गर्भ में मतिज्ञान, श्रुत ज्ञान और अवधि ज्ञान के साथ गर्भ में अवतरित होते हैं।
यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तप कल्याणक के चौथे दिन धर्म सभा में प्रगट की, ब्रह्मचारी गजू भैय्या, राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने पंचकल्याणक महोत्सव आमोद प्रमोद मनोरंजन के कार्य नहीं है, इसमें आपको हर क्रिया को, साधु संतों के प्रवचन को सुनकर जीवन में पुण्य अर्जन करना चाहिए आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी के मार्मिक प्रवचन हुए। मुनि श्री ने बताया कि पंच कल्याणक नर से नारायण ,कंकर से भगवान, बनाने का धार्मिक अनुष्ठान है प्रत्येक माता को बालकों को बिना मंदिर श्री जी के दर्शन बिना भोजन नहीं कराने के लिए संकल्पित कराया। वह दुर्भाग्यशाली है जो नगर में पांडाल में होते हुए पंच कल्याणक की क्रिया। आचार्य साधुओं के प्रवचन नही श्रवण करते है।
पंच कल्याणक समिति की ओर से सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक के वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में युवराज राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन, पंडित मनोज, पंडित भागचंद, पंडित विशाल धरियावद के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का युवराज राज्याभिषेक करवाया गया।
बाद में वैराग्य दर्शन व तीर्थंकर युवराज का गृह त्याग का मंचन किया गया। प्रवक्ता रमेश काला राजेश अरिहंत ने बताया कि आचायश्री के सान्निध्य में दीक्षा विधि संस्कार, तप कल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया।
दीक्षा के दौरान पांडाल में मौजूद हजारों जैन समाज के लोगों ने श्री पार्श्वनाथ महामुनि एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के जयकारों से गूंजा। कार्यक्रम काशी नगरी में विभिन्न कार्यक्रम हुए।वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन परिवार ने किया। दिगम्बर जैन महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।
शास्त्र भेंट व पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य को मिला। भगवान के माता पिता ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत के साथ अन्य व्रत नियम लिए। पंडित भागचंद जी अनुसार 11 नवंबर को होगी केवल ज्ञान की क्रिया प्रात: अभिषेक पूजन आचार्य श्री के प्रवचन के बाद महामुनिराज की आहार चर्या पंच आश्चर्य, विमान शुद्धि, मंदिर वेदी शुद्धि हवन के बाद दोपहर को केवल ज्ञान के संस्कार और भगवान को सूरी मंत्र दिए जाएंगे समवशरण में आचार्य श्री की दिव्य देशना होगी। रात्रि में श्री जी और आचार्य श्री की आरती ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम होगे।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement
Advertisement