The tradition of eating langar by sitting in a row was started by Guru Nanak Dev Ji: Anil Vij-m.khaskhabar.com
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एक पंक्ति में बैठकर लंगर करने की परंपरा की शुरुआत गुरु नानक देव जी ने की थीः अनिल विज

khaskhabar.com: बुधवार, 05 नवम्बर 2025 4:29 PM (IST)
एक पंक्ति में बैठकर लंगर करने की परंपरा की शुरुआत गुरु नानक देव जी ने की थीः अनिल विज
चंडीगढ़। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने आज प्रदेशवासियों को पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हमें गुरु नानक देव जी के जीवन-दर्शन और शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए तथा समाज में उनका प्रसार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी ने अपने अमूल्य उपदेशों के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, भेदभाव और कुरीतियों को दूर करने का महान कार्य किया। उनका संदेश था — “किरत करो, वंड छको, नाम जपो” — यानी ईमानदारी से मेहनत करो, अपनी कमाई दूसरों के साथ बाँटो, और परमात्मा का स्मरण करते रहो। यही शिक्षा आज के समाज के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आज अंबाला स्थित पंजाबी गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका और श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव के पावन अवसर पर संगत को शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी द्वारा उन्हें सिरोपा और कृपाण भेंट की गई। विज ने संगत के बीच बैठकर गुरु का लंगर भी ग्रहण किया।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पावन और शुभ है, यह वह दिन है जब सिख पंथ के प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी का प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस काल में गुरु नानक देव जी का प्रकाश हुआ, उस समय समाज रूढ़िवाद, भेदभाव और झूठ के जाल में जकड़ा हुआ था। गुरु नानक देव जी ने अपने उपदेशों द्वारा लोगों को जागरूक किया और बताया कि यह सब हमारे धर्म के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सिखाया कि मेहनत से कमाई गई रोज़ी सबसे पवित्र होती है।
विज ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने सामाजिक समरसता का एक महान उदाहरण प्रस्तुत किया — उन्होंने सिखाया कि सभी मनुष्य समान हैं। उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच, धन-दौलत के भेदभाव को नकारते हुए “एक पंक्ति में बैठकर लंगर करने” की परंपरा प्रारंभ की। यह परंपरा आज भी समानता, सेवा और विनम्रता का प्रतीक बनी हुई है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने भाई लालो और भाई मलिक भागो की कथा के माध्यम से सत्य, ईमानदारी और धर्म का सच्चा अर्थ समझाया। जब दोनों ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया, तो गुरु नानक देव जी ने गरीब और परिश्रमी भाई लालो के घर का भोजन स्वीकार किया क्योंकि वह ईमानदारी की कमाई से बना था, जबकि मलिक भागो के भव्य भोज को उन्होंने अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह अन्यायपूर्वक कमाए धन से तैयार किया गया था। यह कथा आज भी हमें सिखाती है कि ईमानदारी और परिश्रम से अर्जित धन ही सच्चा धर्म है।
अनिल विज ने कहा कि गुरु नानक देव जी केवल भारत तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने विश्व भ्रमण किया और अपने उपदेशों के माध्यम से मानवता को सत्य, प्रेम, और एकता का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को अंधविश्वास और पाखंड से मुक्त होकर सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनकी शिक्षाओं में न केवल धार्मिक भावना थी, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का स्वर भी था - उन्होंने हमें बताया कि सच्ची भक्ति कर्म से जुड़ी होती है, निष्क्रियता से नहीं।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभाजन, असहिष्णुता और भौतिकता की ओर बढ़ रहा है, गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि जीवन का आधार सेवा, सत्य और समर्पण है।उन्होंने कहा कि हमें गुरु नानक देव जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में भाईचारा, समानता और सद्भाव स्थापित करना चाहिए।
विज ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि गुरु नानक देव जी का जीवन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानवता और सेवा की सर्वोच्च भावना का प्रतीक है। उनकी शिक्षाएँ हमें यह सिखाती हैं कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान कुलजीत सिंह बेदी, पूर्व प्रधान बी.एस. बिंद्रा, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद, उपप्रधान गुरविंदर सिंह सेठी, कोषाध्यक्ष सरदार कुलवंत सिंह, जनरल सेक्रेटरी मनिंदर सिंह बिंद्रा, अमरप्रीत सिंह, हरविंदर सिंह नीटू, सुदर्शन सहगल, संजीव सोनी, रणजीत सिंह, जसबीर सिंह जस्सी, रवि बुदिराजा, राजा, आशीष अग्रवाल, के.पी. सिंह, प्रवेश शर्मा, बलित नागपाल, बलकेश वत्स, नरेश, मदनलाल शर्मा, अनिल बहल, राजेंद्र सिंह और दीपक भसीन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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