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राजस्थान में सियासत के तीन राजकुमारों की कहानी...चुनावी बिसात पर चौंकाने वाली चाल

दूसरा और तीसरा राजकुमार: मालवीया ने अपनी जीत पक्की करने के लिए खुद के उम्मीदवार उतारे। इनमें से एक थे हीरालाल और दूसरे प्रेमजी। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब हीरालाल को 74,598 और प्रेमजी को 41,790 वोट मिले। फिर भी, राजकुमार रोत ने मालवीया को 2,47,054 वोटों से हराया।
चुनावी माहौल को और जटिल बनाते हुए, कांग्रेस ने अरविंद सीता डामोर को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। गठबंधन की प्रक्रिया के दौरान, जब अरविंद को नामांकन वापस लेने को कहा गया, तो वे गायब हो गए। इसके पीछे भी मालवीया का हाथ होने की अटकलें लगाई गईं। लेकिन, अरविंद ने नामांकन वापस नहीं लिया, जिससे कांग्रेस को अंततः बाप प्रत्याशी का समर्थन करना पड़ा। फिर भी, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद को 61,211 वोट मिले।
इस चुनावी मैदान में अन्य खिलाड़ी भी थे। बहुजन समाज पार्टी के दिलीप मीणा को 8,591 वोट, इंडियन पिपुल्स ग्रीन पार्टी के शंकरलाल बामनिया को 17,188 वोट, निर्दलीय बंसीलाल अहारी को 17,896 वोट और नोटा को 20,970 वोट मिले।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवीया और बीजेपी की यह हार एक बड़ी रणनीतिक विफलता है। इसके साथ ही, मालवीया के राजनीतिक करियर पर भी एक बड़ा विराम लग गया है। इस चुनाव ने साबित कर दिया कि राजनीति में हर चाल मायने रखती है और कभी-कभी जीत का सेहरा किसी और के सिर बंध जाता है, चाहे मोहरे कितने भी मजबूत क्यों न हों।
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