भारतीय वायुसेना को तेजस मार्क 1 अल्फा का इंतजार, रिव्यू मीटिंग की तारीख को लेकर एचएएल की तरफ से सस्पेंस बरकरार

एचएएल के पूर्व सीएमडी डॉ डीके सुनील ने स्पष्ट किया था कि 21 एयरक्राफ्ट तैयार हैं और उनका कैट-बी इंजन के साथ परीक्षण भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा था कि डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े 1-2 आइटम अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।
डॉ डीके सुनील ने यह भी बताया था कि पिछले साल दिसंबर में वायुसेना के साथ हुई रिव्यू मीटिंग के दौरान बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार के इंटीग्रेशन का काम पूरा हो चुका था। हालांकि, एक-दो चीजें अभी बाकी हैं, जिनमें रडार की परफॉर्मेंस से जुड़ा काम शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि मई में होने वाली बैठक में इसे मंजूरी मिल जाएगी और कोई फैसला हो जाएगा। हालांकि, अब तक रिव्यू मीटिंग ही नहीं हो सकी है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अगर एचएएल अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर देता है तो तेजस की डिलीवरी की तारीख भी तय हो सकती है। वहीं, यदि ये जरूरतें पूरी नहीं होतीं तो डिलीवरी में फिर देरी हो सकती है। इस बैठक के नतीजे काफी हद तक तय करेंगे कि एचएएल पहला एयरक्राफ्ट वायुसेना को कब तक सौंप पाएगी।
इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद भी तेजस मार्क 1ए को एएसक्यूआर (एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट) पर खरा उतरना होगा। यानी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक तय किए गए एएसक्यूआर मानकों को विमान को पूरा करना जरूरी होगा। किसी भी एयरक्राफ्ट को तैयार होने और वायुसेना में शामिल होने में समय लगता है। इसकी वजह भारतीय वायुसेना द्वारा निर्धारित मानकों के तहत होने वाली सख्त जांच प्रक्रिया है।
एचएएल द्वारा दिए जा रहे एयरक्राफ्ट को पहले एएसक्यूआर मानकों पर खुद को साबित करना होगा, उसके बाद ही वायुसेना में उसकी एंट्री होगी। एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें एयरक्राफ्ट की तकनीकी और ऑपरेशनल जरूरतों का पूरा ब्लूप्रिंट शामिल होता है।
फैक्ट्री से बाहर आने के बाद वायुसेना की तकनीकी टीम एयरक्राफ्ट का निरीक्षण करेगी और टेस्ट पायलट उसकी उड़ान भरेंगे। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विमान एएसक्यूआर के मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। निरीक्षण के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि कोई कमी पाई जाती है तो एचएएल को उसे दुरुस्त करने के लिए कहा जाएगा। इसके बाद ही भारतीय वायुसेना को पहला तेजस मार्क 1ए मिलने का रास्ता साफ होगा।
तेजस प्रोग्राम अब तक धीमी गति से आगे बढ़ रहा था, जिसकी मुख्य वजह इंजन की डिलीवरी में देरी थी। हालांकि, अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं। तेजस मार्क 1ए प्रोग्राम के लिए इंजन की डील अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) के साथ साल 2021 में हुई थी। इस समझौते के तहत भारत को कुल 99 एफ404 इंजन मिलने हैं।
फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख भी नाराजगी जता चुके हैं। तेजस के कई वेरिएंट हैं- तेजस मार्क-1, तेजस मार्क 1ए, तेजस ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तेजस मार्क-2। इनमें तेजस मार्क-2 सबसे एडवांस वर्जन होगा, जिस पर फिलहाल काम जारी है।
मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भारतीय वायुसेना को 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की जरूरत है, लेकिन फिलहाल वह सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन के साथ काम चला रही है। इस कमी को तेजस के जरिए पूरा किया जाना है। वायुसेना पहले ही 40 तेजस विमान शामिल कर चुकी है। एचएएल के साथ 83 एलसीए तेजस मार्क 1ए की डील भी हो चुकी है, लेकिन अब तक उनकी डिलीवरी शुरू नहीं हो पाई है।
खास बात यह है कि बिना किसी डिलीवरी के अतिरिक्त 97 तेजस मार्क 1ए का ऑर्डर भी दिया जा चुका है। इन 83 तेजस मार्क 1ए से कुल 4 स्क्वाड्रन तैयार होंगे। इसके अलावा, 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन के लिए 97 तेजस मार्क 1ए की खरीद की डील भी हो चुकी है। तेजस के कुल 11 स्क्वाड्रन में से 2 पहले ही शामिल हो चुके हैं, जबकि 9 स्क्वाड्रन अभी शामिल होने बाकी हैं।
--आईएएनएस
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