The grand Martyrs Memorial is a result of Anil Vijs vision; this contribution will be remembered for generations: B.L. Verma-m.khaskhabar.com
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अनिल विज की दूरदर्शिता का परिणाम है भव्य शहीद स्मारक, पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा यह योगदान : बीएल वर्मा

khaskhabar.com: मंगलवार, 09 जून 2026 5:44 PM (IST)
अनिल विज की दूरदर्शिता का परिणाम है भव्य शहीद स्मारक, पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा यह योगदान : बीएल वर्मा
अंबाला। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि अंबाला क्रांतिकारियों की धरती रही है और यहां निर्मित ’’“आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक”’’ न केवल देश बल्कि एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बनने जा रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शीघ्र ही इस भव्य स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे नई पीढ़ी देश के गौरवशाली और वास्तविक इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से जान और समझ सकेगी। वर्मा अंबाला छावनी में निर्माणाधीन ’’आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक’’ का अवलोकन करने के उपरांत मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज भी उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्मारक के पूर्ण होने और जनता के लिए खुलने के बाद इसकी भव्यता और दिव्यता देश-दुनिया के लोगों को आकर्षित करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्मारक इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा तथा देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आएंगे।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज पिछले लगभग 30 वर्षों से इस स्मारक के निर्माण के लिए निरंतर संघर्षरत रहे हैं, के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्मारक का अवलोकन करने के दौरान वे स्वयं आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा कि “अब तक मैं भी वही मानता था जो इतिहास की पुस्तकों में लिखा गया है, लेकिन यहां प्रदर्शित अंग्रेजों के आधिकारिक दस्तावेजों और टेलीग्रामों को देखने के बाद यह स्पष्ट होता है कि 10 मई 1857, रविवार सुबह 9 बजे अंबाला छावनी से क्रांति की चिंगारी भड़की थी। ऐसे प्रमाणों को इतिहास में उचित स्थान मिलना ही चाहिए और अब इसे इतिहास में जोड जाएगा।”
वर्मा ने कहा कि स्मारक में आधुनिक तकनीक के माध्यम से 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यहां प्रदर्शित ऐतिहासिक घटनाओं, क्रांतिकारियों के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन की झलकियों को देखकर वास्तव में यहां से जाने का मन नहीं करता। उन्होंने कहा कि स्मारक में बहुउद्देशीय सुविधाओं का भी समावेश किया गया है, जिससे यह केवल एक स्मारक ही नहीं, बल्कि एक जीवंत ऐतिहासिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित होगा।
उन्होंने ऊर्जा मंत्री अनिल विज की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि श्री विज एक विजनरी नेता हैं। उनकी सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि यह ऐतिहासिक परियोजना साकार रूप ले सकी है। उन्होंने कहा कि स्मारक में यह भी दर्शाया गया है कि 1857 की क्रांति के दौरान रोटी, कमल और पेड़ों की छाल जैसे साधनों का उपयोग गुप्त संदेशों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता था। यह जानकारी नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।
उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि पूरे शहीद स्मारक का विस्तार से अवलोकन करने में लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज के आमंत्रण पर वे भविष्य में पुनः यहां अवश्य आएंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द से जल्द इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करें, ताकि देश की युवा पीढ़ी अपने वास्तविक इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सके। उन्होंने कहा कि पढ़ने, सुनने और प्रत्यक्ष देखने में बड़ा अंतर होता है। जब इतिहास आंखों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत होता है, तो वह मन और मस्तिष्क पर स्थायी छाप छोड़ता है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं और यह अवधि विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित रही है।
अवलोकन के दौरान ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने केंद्रीय मंत्री को वॉक-थ्रू प्रस्तुति के माध्यम से शहीद स्मारक की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न गैलरियों में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, वीर क्रांतिकारियों और ऐतिहासिक युद्धों के जीवंत चित्रण के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान दोनों नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर चर्चा की तथा उनके जीवन और संघर्षों से जुड़े प्रसंगों को साझा किया।
विज ने केंद्रीय मंत्री को यह भी बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शाहजहांपुर में प्राप्त 1857 कालीन राइफल और कारतूस का उल्लेख किया था। इन ऐतिहासिक धरोहरों को भी शहीद स्मारक में प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह स्मारक देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक है, जिसके निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्मारक में 22 अत्याधुनिक गैलरियों के माध्यम से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, विभिन्न युद्धों और वीर शहीदों के बलिदान का जीवंत चित्रण किया गया है।
इस पर केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने विज की सराहना करते हुए कहा कि यह स्मारक उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का स्थायी प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य व्यक्ति को उसके जीवनकाल के बाद भी लोगों की स्मृतियों में जीवित रखते हैं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ‘‘ विज के यह सार्थक प्रयास जिंदा रहेंगें क्योंकि विज रहेंगें तो भी याद किए जाएंगें या नहीं रहेंगें तो भी याद किए जाएंगें’’।
अवलोकन के दौरान केंद्रीय मंत्री को 1857 कालीन टेलीग्राम, कठपुतली प्रदर्शन, देशभर से एकत्रित पवित्र मिट्टी और अन्य ऐतिहासिक प्रदर्शनों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने डिजिटल माध्यम से 1857 के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा “भारत माता की जय” के उद्घोष लगाए।
इससे पूर्व दोनों मंत्रियों ने शहीद स्मारक परिसर में रुद्राक्ष का पौधारोपण भी किया।
इस अवसर पर एसडीएम कनिका गोयल, नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद के अलावा भाजपा नेता कपिल विज, संजीव वालिया, विपिन्न खन्ना, संजीव सोनी, राजीव गुप्ता, विजेंद्र चौहान, किरणपाल चौहान, जसबीर जस्सी, अजय बवेजा, प्रवेश शर्मा, रवि बुद्धिराजा, हर्ष बिंद्रा, विकास बहगल, आशीष अग्रवाल, भरत कोछड़, फकीरचंद सैनी, वरिंद्र सिंह, सुभाष शर्मा, सुनील नदारिया, इकबाल ढांडा, सुरेंद्र सहगल, राज कुमार राजा, राजू बाली, ललित, सुरेंद्र सहगल गोपी, अनिल बहल, अनिल नागर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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