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अदालत में दर्ज फोरेंसिक नतीजों को राजनीति के लिए तोड़ा-मरोड़ा नहीं जा सकता : आप

अमन अरोड़ा ने कहा कि अदालत के सामने रखे गए फोरेंसिक नतीजों पर सवाल उठाना किसी राजनीतिक पार्टी या सरकार पर सवाल उठाना नहीं है। यह अदालत के फैसले पर सवाल उठाना है। एक बार जब अदालत ने अपना फैसला सुना दिया, तो उसके नतीजों से इनकार करना राजनीति नहीं, बल्कि कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) की मानहानि है।
सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गुमराहकुन बातों का जवाब देते हुए 'आप' मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने कहा कि झूठी कहानी को दोहराने से अदालती तथ्य नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि अदालत ने फोरेंसिक सबूतों की जांच की और अपना नतीजा दर्ज किया। वह न्यायिक निष्कर्ष रिकॉर्ड पर है। कोई भी राजनीतिक व्याख्या अदालत द्वारा स्वीकृत फोरेंसिक रिपोर्ट को रद्द नहीं कर सकती।
कांग्रेसी नेता परगट सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भुल्लर ने कहा कि छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के आधार पर धार्मिक भावनाओं को विवाद में घसीटना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि सिख कौम सच्चाई और ईमानदारी की हकदार है, राजनीतिक फायदे के लिए जाली क्लिप्स की नहीं।
जाली सामग्री के बचाव के लिए गुरु साहिबान के सम्मानित नाम का इस्तेमाल करना ही असल में सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। 'आप' नेताओं ने परगट सिंह और सुनील जाखड़ को सलाह दी कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की मांग है कि राजनीतिक सुविधाओं की परवाह किए बिना न्यायिक संस्थाओं का सम्मान किया जाए और अदालती फैसलों को स्वीकार किया जाए।
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