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कामां नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर फंसा पेंच : 13 भाजपाई और 10 निर्दलीयों की गुरुग्राम में बाड़ेबंदी

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, जोड़-तोड़ और सेंधमारी की आशंका को देखते हुए सभी 23 पार्षदों को गुरुग्राम स्थित 'चोपड़ा फार्म्स एंड रिसॉर्ट्स' (Chopra Farms & Resorts) में ठहराया गया है। संख्याबल के लिहाज से 23 का आंकड़ा स्पष्ट बहुमत की रेखा को आसानी से पार करता है, लेकिन असली घमासान उस नाम को लेकर छिड़ा है जिसे भाजपा अपना आधिकारिक अध्यक्ष प्रत्याशी घोषित करेगी।
चेयरमैन की दौड़ में दो प्रमुख नाम: संगठन निष्ठा बनाम सियासी समझौता
नगरपालिका अध्यक्ष की दौड़ में मुख्य रूप से दो चेहरे आमने-सामने खड़े हैं, जिसने संगठन के भीतर भी नैतिक और नीतिगत द्वंद्व पैदा कर दिया है:
1. श्याम सुंदर शर्मा (वार्ड 17 - अधिकृत भाजपा पार्षद) : पार्टी के मूल कैडर और अनुशासित कार्यकर्ताओं की स्वाभाविक पसंद श्याम सुंदर शर्मा हैं, जिन्होंने भाजपा के आधिकारिक सिंबल पर वार्ड 17 से जीत दर्ज की है। पार्टी की स्थापित रीति-नीति और संगठनात्मक मर्यादा यही कहती है कि प्राथमिकता मूल सिंबल पर जीतकर आए 13 पार्षदों में से ही किसी निष्ठावान कार्यकर्ता को मिलनी चाहिए।
2. सत्यदेव शर्मा (वार्ड 22 - निर्दलीय पार्षद) : दूसरा नाम वार्ड 22 से जीतकर आए निर्दलीय पार्षद सत्यदेव शर्मा का तेजी से उभर रहा है। सत्यदेव शर्मा ने टिकट न मिलने पर भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया था। अब बाड़ेबंदी और समीकरणों के खेल में उनका नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुखता से चर्चा में है।
भाजपा की 'कथनी और करनी' की परीक्षा
चुनाव प्रक्रिया के दौरान भाजपा नेतृत्व ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी थी कि पार्टी से बगावत कर मैदान में उतरने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उन्हें निष्कासित किया जाएगा। ऐसे में अब स्थानीय सियासत के जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि:
क्या पार्टी अपनी घोषित नीति और अनुशासन पर अडिग रहते हुए मूल सिंबल से जीते श्याम सुंदर शर्मा को प्रत्याशी बनाकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगी?
या फिर सत्ता के जादुई समीकरण साधने के दबाव में अपने ही नियमों को दरकिनार कर उस चेहरे पर दांव लगाएगी जिसने चुनाव में पार्टी की जड़ों पर प्रहार किया था?
कामां की जनता और भाजपा कार्यकर्ता अब टकटकी लगाए इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि गुरुग्राम के रिसॉर्ट से बाहर आने वाला फैसला पार्टी की विचारधारा की जीत साबित होता है या फिर समझौते की राजनीति का एक और उदाहरण।
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