Shri Krishna Janmashtami: Celebrations of Krishna birth reach their peak in Mathura amidst rain and an atmosphere of devotion-m.khaskhabar.com
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमीः मथुरा में बारिश और भक्ति के माहौल के बीच कृष्ण जन्म का जश्न चरम पर

khaskhabar.com: शुक्रवार, 04 सितम्बर 2026 10:39 PM (IST)
श्रीकृष्ण जन्माष्टमीः मथुरा में बारिश और भक्ति के माहौल के बीच कृष्ण जन्म का जश्न चरम पर
खास खबर। मथुरा शुक्रवार को मथुरा 'भक्ति के सागर' में बदल गया। भगवान कृष्ण के जन्म का त्योहार, कृष्ण जन्माष्टमी मनाने के लिए हजारों भक्त इकट्ठा हुए। शाम को अचानक हुई बारिश ने दिन भर की गर्मी और उमस से बहुत जरूरी राहत दी और त्योहार के माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।
जब भक्त मंदिरों और बाजारों की ओर जा रहे थे, तो शहर में काले बादल छा गए। कुछ ही मिनटों में हल्की बारिश शुरू हो गई, जिससे कुछ लोग दुकानों के सामने, मंदिरों के बरामदों और दूसरी ढकी हुई जगहों पर शरण लेने के लिए भागने लगे। हालांकि, बारिश भक्तों के उत्साह को कम नहीं कर पाई। बारिश रुकने के बाद, भीड़ ने फिर से मंदिरों की ओर अपना सफर शुरू कर दिया।
शुक्रवार को मथुरा में अलग-अलग राज्यों से भक्तों का लगातार आना-जाना लगा रहा। शाम तक मुख्य सड़कें और बाजार खचाखच भर गए थे और श्री कृष्ण जन्मभूमि पर दर्शन के लिए लंबी लाइनें लग गई थीं। ट्रैफिक पर भी असर पड़ा। भूतेश्वर चौराहा, जन्मभूमि लिंक रोड, भरतपुर गेट, गोविंद नगर तिराहा और महाविद्या कॉलोनी के आसपास जाम की स्थिति रही। भीड़ को संभालने के लिए मुख्य चौराहों पर पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों को तैनात किया गया था।
वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में आधी रात को होने वाले जन्म उत्सव की खास तैयारी की गई थी। आगरा में ड्राई फ्रूट्स और पारंपरिक 'पाग' (एक तरह की मिठाई) में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से बना 21 किलो का केक भगवान को चढ़ाया गया और फिर भक्तों में प्रसाद के तौर पर बांटा गया। आधी रात को भगवान का पंचामृत, केसर और उत्तराखंड से लाई गई जड़ी-बूटियों से भव्य अभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें नए कपड़े पहनाए गए और मोर पंख लगाकर बाल-रूप में भव्य रूप से सजाया गया।
मंदिर की सालाना 'मंगला आरती', जो साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी पर होती है, एक और मुख्य आकर्षण थी। इस साल, इस खास रस्म के लिए मंदिर के अंदर सिर्फ 600 लोगों को जाने की इजाजत थी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिसकर्मियों के लिए एंट्री पास की व्यवस्था थी। वहीं, 'कृष्ण उत्सव 2026' ने मथुरा को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने शहर भर में 27 सजे-धजे मंच तैयार किए थे, जहां अलग-अलग इलाकों के लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां दिखाई गईं। गलियों में 'राधे-राधे' और 'जय श्री कृष्ण' के जयकारे गूंज रहे थे और मथुरा भक्ति में डूबा हुआ था। भक्तों का कहना था कि शाम की बारिश ने कान्हा के जन्म का जश्न मनाने की खुशी को और बढ़ा दिया। -आईएएनएस

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