Shashi Tharoor questions the delay in the work of the LGBTQAIA plus panel-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Aug 15, 2026 2:47 pm
khaskhabar
Location
 
   राजस्थान और हरियाणा सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

शशि थरूर ने LGBTQAIA-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए

khaskhabar.com: बुधवार, 05 अगस्त 2026 5:33 PM (IST)
शशि थरूर ने LGBTQAIA-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए
नई दिल्ली । सरकार ने बताया है कि समलैंगिक जोड़ों से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए बनाई गई केंद्र की हाई-पावर्ड कमेटी अब तक सिर्फ दो बार ही मिली है। उसने अभी तक कोई सिफारिश या रिपोर्ट नहीं सौंपी है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के एक सवाल के जवाब में यह बात सामने आई। मंगलवार को थरूर को मिले जवाब में कहा गया है कि यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के 'सुप्रियो मामले' में दिए गए फैसले के बाद बनाई गई थी। इसमें यह भी कहा गया है कि इस पैनल की आखिरी बैठक दो साल से भी ज्यादा समय पहले हुई थी। बुधवार को सोशल मीडिया पर इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा, "मेरे सवाल पर सरकार का जवाब सुप्रीम कोर्ट के सुप्रियो फैसले के बाद बनाई गई हाई-पावर्ड कमेटी की पूरी विफलता को उजागर करता है। इससे भी अहम बात यह है कि सरकार में एलजीबीटीक्यूएआईए-प्लस समुदाय के हमारे साथी नागरिकों के लिए सार्थक अधिकार सुनिश्चित करने और समलैंगिक जोड़ों की चिंताओं को दूर करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की पूरी तरह कमी है। गठन के दो साल से ज्यादा समय बाद भी, कमेटी की बैठक सिर्फ दो बार हुई है। इसकी आखिरी बैठक दो साल से भी ज्यादा समय पहले हुई थी और इसने अभी तक एक भी सिफारिश या रिपोर्ट नहीं दी है।"
उन्होंने कहा, "केंद्र के अंतरिम उपाय सार्थक कानूनी सुधार का विकल्प नहीं हो सकते। एडवाइजरी से अधिकार नहीं बनते। वे आवास, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, विरासत, संयुक्त वित्तीय लाभ, निकटतम रिश्तेदार की मान्यता, चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने या सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच की गारंटी नहीं देते। अगर सरकार का मानना ​​है कि इन सवालों पर कमेटी की सिफारिशों का इंतजार किया जाना चाहिए, तो उसे बताना होगा कि कमेटी खुद दो साल से ज्यादा समय से लगभग निष्क्रिय क्यों है?"
थरूर ने पूछा, "कोई भी यह पूछने पर मजबूर हो सकता है कि क्या कमेटी सिर्फ कोर्ट को खुश करने के लिए बनाई गई थी, जबकि इसके काम को आगे बढ़ाने का कोई वास्तविक इरादा नहीं था? अफसोस की बात है कि सरकार का अपना जवाब इसी ओर इशारा करता है।"

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement