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शशि थरूर ने LGBTQAIA-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए

उन्होंने कहा, "केंद्र के अंतरिम उपाय सार्थक कानूनी सुधार का विकल्प नहीं हो सकते। एडवाइजरी से अधिकार नहीं बनते। वे आवास, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, विरासत, संयुक्त वित्तीय लाभ, निकटतम रिश्तेदार की मान्यता, चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने या सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच की गारंटी नहीं देते। अगर सरकार का मानना है कि इन सवालों पर कमेटी की सिफारिशों का इंतजार किया जाना चाहिए, तो उसे बताना होगा कि कमेटी खुद दो साल से ज्यादा समय से लगभग निष्क्रिय क्यों है?"
थरूर ने पूछा, "कोई भी यह पूछने पर मजबूर हो सकता है कि क्या कमेटी सिर्फ कोर्ट को खुश करने के लिए बनाई गई थी, जबकि इसके काम को आगे बढ़ाने का कोई वास्तविक इरादा नहीं था? अफसोस की बात है कि सरकार का अपना जवाब इसी ओर इशारा करता है।"
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