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1996 के LBSNAA हॉस्टल की वो एक तस्वीर... वरिष्ठ IAS अजिताभ शर्मा ने शेयर किया 'तैयारी और आकांक्षाओं' का सबसे बड़ा मर्म

जब कैमरे से बेखबर गहरी सोच में डूबे थे अजिताभ शर्मा
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजिताभ शर्मा ने अपनी इस थ्रोबैक तस्वीर के साथ अपने उस दौर की यादों को ताज़ा करते हुए लिखा कि यह तस्वीर 1996 की है, जब वे मसूरी स्थित LBSNAA के अपने हॉस्टल के कमरे में मौजूद थे।
वे याद करते हुए बताते हैं, "मेरे रूममेट ने यह तस्वीर तब क्लिक की थी, जब मुझे इसका अहसास भी नहीं था कि कोई फोटो ली जा रही है। मैं किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था। अकादमी में ट्रेनिंग का वह दौर वास्तव में अविस्मरणीय था—जहां बहुत कुछ सीखने को मिला, ढेर सारी हंसी-ठिठोली थी और अनगिनत बातें थीं। लेकिन उसी बीच, आगे क्या होने वाला है—इस पर विचार करने का वक्त भी था।"
कॉलेज का सफर खत्म हो चुका था और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के रूप में एक नए करियर की बस शुरुआत ही हो रही थी। अजिताभ शर्मा लिखते हैं कि उस वक्त उनके मन में एक ही यक्ष प्रश्न घूम रहा था : "क्या मैं उन बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार हूं जो यह पद अपने साथ लाएगा? या फिर मैं किसी और काम के लिए बेहतर हूं?"
असली सवाल यही था—“क्या मैं इसके लिए वाकई तैयार हूं?” और उन्होंने साझा किया कि वे तब से लेकर आज तक खुद को इसी के लिए तैयार करते आ रहे हैं।
"आकांक्षाएं दिशा देती हैं, पर तैयारी प्रदर्शन तय करती है"
अपने इस 'संडे म्यूज़िंग्स' (Sunday Musings) पोस्ट में अजिताभ शर्मा ने आगे लिखा कि आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें अहसास होता है कि यह एक ऐसा सवाल है जिसका सामना हम सभी को जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों पर करना पड़ता है।
उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने की सोच रखने वाले युवाओं और पेशेवरों के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए:
स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment) : बहुत से लोगों को लगता है कि वे आज जो कर रहे हैं, उससे कहीं ज़्यादा करने में सक्षम हैं। कुछ लोग अपनी भूमिकाएँ बदलने का सोचते हैं, तो कुछ संगठन बदलने का। लेकिन कोई भी कदम उठाने से पहले खुद से यह पूछना ज़रूरी है—"क्या मैं उस चीज़ के लिए वास्तव में तैयार हूँ, जिसकी मुझे तलाश है?"
दिशा और क्षमता (Direction vs Capability) : आकांक्षाएं (Aspirations) हमें केवल एक सही दिशा देती हैं, लेकिन हमारी तैयारी (Preparation) ही हमें सही वक्त पर प्रदर्शन करने की वास्तविक क्षमता प्रदान करती है।
अवसर और तत्परता : अवसर तो हर किसी के जीवन में आते हैं, लेकिन असली अंतर केवल इस बात से पड़ता है कि क्या हमने उनके आने से पहले खुद को तैयार किया था या नहीं।
"ठहरे मत रहिए, अपनी आकांक्षाओं को सींचिए"
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजिताभ शर्मा ने अपनी बात को समाप्त करते हुए सभी को यह सलाह दी कि कभी भी अपनी आकांक्षाओं को रोज़मर्रा की दिनचर्या, संशय और देरी के बोझ तले दबने न दें। उन्हें सींचिए और लगातार निखारिए।
उनका संदेश एकदम स्पष्ट है-"अगर आप तैयार हैं, तो आगे बढ़िए। अगर नहीं हैं, तो पहले तैयारी कीजिए। लेकिन कभी भी एक जगह ठहरे मत रहिए।"
वरिष्ठ आईएएस अजिताभ शर्मा की यह पोस्ट न केवल सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए, बल्कि करियर के किसी भी पड़ाव पर खड़े हर उस इंसान के लिए एक मार्गदर्शक का काम करती है, जो खुद को निखारने और नए अवसरों को भुनाने का सपना देखता है।
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