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सारनाथ का विश्व धरोहर बनना वाराणसी और देश के लिए गर्व का पल : गजेंद्र सिंह शेखावत

उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी। इससे न सिर्फ वाराणसी की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी।
सारनाथ वह पवित्र जगह है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म की शुरुआत यहीं से मानी जाती है। इस धरोहर स्थल में चौखंडी स्तूप (यहीं बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले थे।), और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष, जिनमें प्रसिद्ध धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ शामिल हैं।
सारनाथ के विश्व धरोहर बनने से स्थानीय लोगों और बौद्ध अनुयायियों में खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि अब दुनियाभर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां आएंगे। इससे वाराणसी को एक नई पहचान मिलेगी और यहां का पर्यटन और भी बढ़ेगा।
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