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सारनाथ का विश्व धरोहर बनना वाराणसी और देश के लिए गर्व का पल : गजेंद्र सिंह शेखावत

khaskhabar.com: मंगलवार, 04 अगस्त 2026 3:19 PM (IST)
सारनाथ का विश्व धरोहर बनना वाराणसी और देश के लिए गर्व का पल : गजेंद्र सिंह शेखावत
वाराणसी । बौद्ध धर्म की पवित्र नगरी सारनाथ को अब दुनियाभर में नई पहचान मिल गई है। यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन) ने 25 जुलाई को सारनाथ को भारत की 45वीं विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया। इसे लेकर केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को कहा कि यह पल हम सबके लिए, देश के लिए, खासकर वाराणसी वासियों के लिए बहुत गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की इस पुरातात्विक और धार्मिक धरोहर को यूनेस्को की सूची में जगह मिली है। दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में सारनाथ को यह दर्जा मिला। इसी के साथ भारत में अब विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 45 हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सारनाथ को 1998 में ही यूनेस्को की संभावित सूची यानी टेंटेटिव लिस्ट में रखा गया था। अब जाकर इसे अंतिम मान्यता मिली है।
उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी। इससे न सिर्फ वाराणसी की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी।
सारनाथ वह पवित्र जगह है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म की शुरुआत यहीं से मानी जाती है। इस धरोहर स्थल में चौखंडी स्तूप (यहीं बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले थे।), और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष, जिनमें प्रसिद्ध धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ शामिल हैं।
सारनाथ के विश्व धरोहर बनने से स्थानीय लोगों और बौद्ध अनुयायियों में खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि अब दुनियाभर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां आएंगे। इससे वाराणसी को एक नई पहचान मिलेगी और यहां का पर्यटन और भी बढ़ेगा।

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