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आईजीएनपी क्षेत्र के क्रॉपिंग पैटर्न एवं जल उपयोग की समीक्षा

उन्होंने अधिकारियों को आईजीएनपी क्षेत्र के लिए व्यापक रिवर बेसिन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही क्षेत्रवार फसल पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन करने को कहा। उन्होंने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ मिशन के तहत कम पानी में अधिक उत्पादन एवं अधिक आर्थिक लाभ देने वाली खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। भारत सरकार के जल एवं आर्थिक उत्पादकता संबंधी लक्ष्यों को भी कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सीएडी विभाग को कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, एटीसी एवं अनुसंधान संस्थानों को इस अभियान से जोड़ा जाए। किसानों के लिए एक्सपोजर विजिट, फील्ड ट्रायल एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि नई तकनीकों और वैकल्पिक फसल प्रणालियों को तेजी से अपनाया जा सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि आईजीएनपी के द्वितीय चरण में प्रेशर इरिगेशन एवं सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई का तेजी से विस्तार किया जाए। किसानों को फार्म डिग्गियों एवं सोलर सिस्टम से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इससे जल की बचत होगी, सिंचाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी तथा कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।
उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों को क्षेत्र विशेष के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। इसबगोल, क्लस्टर बीन तथा कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों की उन्नत किस्मों के विकास एवं प्रसार पर विशेष बल दिया। साथ ही किसानों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल, आयुक्त उद्यानिकी श्वेता चौहान, कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल सहित सीएडी, जल संसाधन विभाग, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर-सीएजेडआरआई, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
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