Refinery Project Cost More Than Doubles Due to Royal Stubbornness of Double-Engine Government; Government Postponing Local Body Elections Out of Fear of Defeat: Tikaram Jully-m.khaskhabar.com
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डबल इंजन सरकार के राजहठ के कारण डबल से अधिक बढ़ी रिफाइनरी की लागत, हार के डर से निकाय चुनाव टाल रही सरकार: टीकाराम जूली

khaskhabar.com: बुधवार, 15 अप्रैल 2026 9:58 PM (IST)
डबल इंजन सरकार के राजहठ के कारण डबल से अधिक बढ़ी रिफाइनरी की लागत, हार के डर से निकाय चुनाव टाल रही सरकार: टीकाराम जूली
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने रिफाइनरी प्रोजेक्ट में जानबूझकर की गई देरी, महिला आरक्षण बिल के पीछे छिपे सियासी एजेंडे और प्रदेश में निकाय-पंचायत चुनाव टालने की लोकतांत्रिक मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास यूपीए सरकार के कार्यकाल में सोनिया गांधी ने वर्ष 2013 में किया था उसे भाजपा ने अपनी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया। जूली ने कहा कि "जो रिफाइनरी महज 37 हजार करोड़ रुपये में बनकर तैयार होनी थी, भाजपा सरकार द्वारा किए गए पांच साल के जानबूझकर विलंब के कारण आज उसकी लागत बढ़कर तकरीबन 80 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई है। यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है। यदि समय पर काम होता, तो आज प्रदेश के लाखों युवाओं के हाथ में रोजगार होता।"
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तंज करते हुए जूली ने कहा कि " मुख्यमंत्री पचपदरा जाकर केवल टेंट, कुर्सी और भीड़ जुटाने की व्यवस्था को ही अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी जवाब देना चाहिए कि आखिर भाजपा ने इतने वर्षों तक इस रिफाइनरी को ठंडे बस्ते में क्यों डाले रखा? टेंट लगाने से विकास नहीं होता, विकास तब होता जब समय पर प्रोजेक्ट पूरा कर युवाओं को रोजगार दिया गया होता।"
महिला आरक्षण: नीयत नेक होती तो जनगणना और परिसीमन का बहाना नहीं बनाती सरकार
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए जूली ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला सशक्तीकरण की पक्षधर रही है और सबसे पहले हम ही यह बिल लेकर आए थे, लेकिन तब इन्हीं लोगों (भाजपा) ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने वर्तमान बिल की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के बीच में इस तरह का कदम उठाना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने मांग की कि इस विषय पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू करना है, तो चलते चुनावों और आचार संहिता के बीच इसे लाने की इतनी हड़बड़ी क्यों?
जूली ने साफ़ कहा कि महिला आरक्षण तो कांग्रेस का ही ब्रेन चाइल्ड है। भाजपा की नियत यदि वास्तव में नारी वंदन की है कि तो देश और राजस्थान में महिला सुरक्षा पर उसकी सरकारों को ध्यान चाहिए। राजस्थान में कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब दुष्कर्म या छेड़छाड़ या हत्या की ख़बरें नहीं आ रही हैं। उन पर ध्यान देना चाहिए भाजपा को ।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा विधानसभा सीटें बढ़ाने और उनके स्वरूप (रिजर्व या महिला सीट) को लेकर दिए जा रहे बयानों पर जूली ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने पूछा कि जब अभी तक परिसीमन आयोग का गठन ही नहीं हुआ है, तो भाजपा नेताओं को यह 'दिव्य ज्ञान' कहाँ से मिल रहा है कि कौन सी सीट रिजर्व होगी और कौन सी नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे बैठकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जो कि असंवैधानिक है।
पराजय के डर से निकाय और पंचायत चुनाव कराने से भाग रही है सरकार -
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बना रही है।
जूली ने कहा कि "भाजपा सरकार अच्छी तरह जानती है कि वह जनता के बीच अपना विश्वास पूरी तरह खो चुकी है। प्रदेश की जनता की नाराजगी और अपनी निश्चित पराजय के डर से घबराकर ही सरकार निकाय और पंचायत चुनाव कराने से भाग रही है। लोकतंत्र में जनता के पास जाने से डरना ही सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।"
जूली ने कहा कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार चुनाव कराने से भाग रही है, जिसके कारण आज जनता की समस्याओं को सुनने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं बल्कि केवल प्रशासक बैठे हैं।
उन्होंने भरतपुर उपचुनाव को जानबूझकर टाले जाने का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि भाजपा सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग बंद करे, अन्यथा कांग्रेस पार्टी जनता की आवाज बनकर सड़क से सदन तक इस तानाशाही का पुरजोर विरोध करेगी।
प्राथमिकता जर्जर विद्यालयों की मरम्मत होनी चाहिए थी या बच्चों के नाम बदलने की मुहिम :
शिक्षा मंत्री की 'सार्थक' नाम की पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए जूली ने कहा कि जिस प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालयों की जर्जर इमारतें मरम्मत मांग रही हैं, इस मुद्दे पर कोर्ट की फटकार पड़ रही है, नामांकन को लेकर और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है, ऐसे हालात में शिक्षा विभाग सार्थक नामों का अभियान चला रहा है। ऊपर से तुर्रा ये कि इनकी सार्थक नामों की लिस्ट में भजनलाल नाम शामिल नहीं है। जूली ने इस पर तंज करते हुए शिक्षा मंत्री से पूछा है कि कहीं इसमें कोई साजिश तो नहीं है।

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