Rajasthan High Court: Bail petition of POCSO Act accused withdrawn, permission granted to file plea again after statement of victims-m.khaskhabar.com
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राजस्थान हाईकोर्ट: पॉक्सो एक्ट के आरोपी की जमानत याचिका विड्रा, पीड़ितों के बयान के बाद दोबारा अर्जी पेश करने की मिली छूट

khaskhabar.com: मंगलवार, 12 अगस्त 2025 11:14 PM (IST)
राजस्थान हाईकोर्ट: पॉक्सो एक्ट के आरोपी की जमानत याचिका विड्रा, पीड़ितों के बयान के बाद दोबारा अर्जी पेश करने की मिली छूट
ब्यावर। राजस्थान हाईकोर्ट ने ब्यावर जिले के बहुचर्चित धर्मांतरण, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी अब्दुल हाकिम कुरैशी को अपनी जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि वह पीड़ितों के बयान दर्ज होने के बाद सक्षम न्यायालय में दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकता है। न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रवीण भटनागर की एकल पीठ ने यह आदेश एस.बी. क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 7957/2025 में पारित किया। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह पंवार ने और परिवादी पीड़ितों की ओर से एडवोकेट जयप्रकाश गुप्ता ने पैरवी की। प्रकरण के मुताबिक याचिकाकर्ता अब्दुल हाकिम कुरैशी पर ब्यावर के विजय नगर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट 2012 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में एफआईआर संख्या 61/2025 दर्ज है। वह इस समय अजमेर की केंद्रीय कारागार में कैद है। आरोपी ने विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मामले, अजमेर के समक्ष जमानत याचिका दायर की थी, जिसे 4 जून 2025 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील विक्रम सिंह पंवार ने न्यायालय से अपनी जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। उन्होंने अदालत से यह अनुरोध भी किया कि उन्हें सभी पीड़ितों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी जाए।
न्यायमूर्ति प्रवीण भटनागर ने याचिकाकर्ता की इस मांग को स्वीकार करते हुए जमानत याचिका को वापस ले लिया। अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को सभी पीड़ितों के बयान दर्ज होने के बाद एक बार फिर से सक्षम न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाती है। इस तरह, यह याचिका वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दी गई है। इस आदेश के बाद, याचिकाकर्ता अब जांच प्रक्रिया के आगे बढ़ने और पीड़ितों के बयान दर्ज होने का इंतजार करेगा, जिसके बाद वह अपनी कानूनी प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकता है।

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