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राजस्थान बजट 2026-27ः विरासत का वैभव और विकास का विजन

khaskhabar.com: मंगलवार, 10 मार्च 2026 09:45 AM (IST)
राजस्थान बजट 2026-27ः  विरासत का वैभव और विकास का विजन
- लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ - राजस्थान की पावन धरा ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध किलों और वैभवशाली महलों के साथ ही अदम्य साहस, अनुपम शौर्य और अक्षुण्ण सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सदियों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने वाला यह प्रदेश अब विकास की एक नई इबारत लिख रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का ₹6,10,956 करोड़ का बजट “विकसित राजस्थान @2047” के लक्ष्य को साकार करने की दूरदर्शी रूपरेखा है। इस बजट की आत्मा में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का कल्याण, पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन, लुप्त होती लोककलाओं का संरक्षण और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में परिलक्षित होती है। राजस्थान में पर्यटन आज अर्थव्यवस्था का सशक्त इंजन बन चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश ने 25.44 करोड़ घरेलू और विदेशी पर्यटकों का स्वागत कर एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
‘झीलों की नगरी’ उदयपुर ने बीते आठ वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए 21.6 लाख पर्यटकों की मेजबानी की। इनमें 1.6 लाख से अधिक विदेशी सैलानी शामिल रहे। यह तथ्य प्रमाणित करता है कि मेवाड़ की सांस्कृतिक आभा और प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षण अब वैश्विक स्तर पर अपने चरम पर है। इस बढ़ते पर्यटन प्रवाह को विश्वस्तरीय अनुभव में रूपांतरित करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर ₹5,000 करोड़ के “राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कैपेसिटी बिल्डिंग फंड” की स्थापना एक ऐतिहासिक पहल है। यह निवेश न केवल पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, सुरक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं विकसित कर प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाएगा।
विकास की इस यात्रा में पर्यावरणीय संतुलन को समान महत्व देते हुए बजट में ‘PRITHWI’ (Project for Resilient and Integrated Terrestrial Habitats and Wildlife Valorization Initiative) के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस पहल से स्पष्ट है कि सरकार विकास और प्रकृति के मध्य संतुलन को लेकर संवेदनशील है।
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी कर वन्यजीव उपचार केंद्रों की स्थापना वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगी। विशेष रूप से केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और सांभर झील में ‘एवियन डिजीज ट्रीटमेंट सेंटर’ की स्थापना से प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और विदेशी पर्यटकों के बीच राजस्थान की विश्वसनीयता और साख में वृद्धि होगी। यह कदम पर्यावरण संरक्षण को पर्यटन से जोड़ते हुए ‘ईको-टूरिज्म’ की अवधारणा को नई दिशा देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बजट में “वोकल फॉर लोकल” के मंत्र को साकार करते हुए पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का संकल्प भी दिखाई देता है। माटी कला के लिए ₹15 करोड़ का प्रावधान और 5 हजार इलेक्ट्रिक चाकों का वितरण केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जड़ों के पुनर्जीवन का सशक्त प्रयास है। इसी क्रम में ₹200 करोड़ के विशेष कोष से 660 प्राचीन हवेलियों का जीर्णोद्धार हमारी वास्तु विरासत को संरक्षित करने की ऐतिहासिक पहल है। यह पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
थार की स्वर्णिम रेत में बसे जैसलमेर के खुड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित “अल्ट्रा-लक्जरी स्पेशल टूरिज्म ज़ोन” राजस्थान को वैश्विक लक्जरी पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में साहसिक कदम है। यह परियोजना उच्चस्तरीय आतिथ्य सेवाओं, विशिष्ट अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के समन्वय से राज्य को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगी। पर्यटन की सफलता का आधार केवल आकर्षण नहीं, बल्कि सुगम पहुंच भी है।
‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ को सुदृढ़ करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक सहज परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, प्रवासी राजस्थानियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से DORA (Domestic and Overseas Rajasthani Affairs) विभाग का विस्तार एक सशक्त ‘सॉफ्ट पावर’ रणनीति है। यह सांस्कृतिक संवाद और निवेश की संभावनाओं को विस्तृत करेगा। यह बजट विकास और विरासत के अद्वितीय समन्वय का दस्तावेज है।
एक लाख नई सरकारी भर्तियों के लिए कैलेंडर जारी करना और निजी व पर्यटन क्षेत्र में सृजित होने वाले लाखों अप्रत्यक्ष रोजगारों के माध्यम से होने वाला आर्थिक सशक्तिकरण समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम सिद्ध होगा। बजट 'विकसित राजस्थान @ 2047' की परिकल्पना को साकार करने वाला एक विजन डॉक्यूमेंट है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को आधार मानकर यह बजट सेवा, समर्पण और सुशासन को समर्पित है।
​सरकार ने समावेशी विकास के लिए चार प्रमुख वर्गों गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति (GYAN) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।​सामाजिक सुरक्षा के लिए 91 लाख से अधिक लाभार्थियों को 28,400 करोड़ रूपए की पेंशन देकर समाज के अंतिम छोर तक सहायता पंहुचाई गई है। ​युवा और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करते हुए भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाकर युवाओं को समयबद्ध रोजगार सुनिश्चित किया जा रहा है।​ अन्नदाता का संबल प्रदान करते हुए किसान सम्मान निधि के माध्यम से 10,900 करोड़ रुपये की सहायता और गेहूं पर 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देकर किसानों को सशक्त किया गया है।
​ नारी शक्ति के लिए 'लखपति दीदी' और सुपोषण न्यूट्री-किट जैसी योजनाओं से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बजट में लगभग 27,860 करोड़ रुपये की लागत से 42,000 किलोमीटर सड़कों का जाल बिछाने का संकल्प लिया गया है। वर्ष 2026-27 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 21 लाख 52 हजार 100 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछली सरकार के अंतिम वर्ष की तुलना में 41.39% अधिक है। ​राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय अब 2,02,349 रुपये तक पहुँचने का अनुमान है, जो पहले 1.67 लाख रुपये थी।​
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी कार्यशैली में विकास का रथ सचमुच विरासत के पहियों पर सवार होकर आगे बढ़ रहा है। यह बजट राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को आर्थिक शक्ति में रूपांतरित करने की ऐतिहासिक पहल है, जिसे आने वाली पीढ़ियां एक स्वर्णिम युग के सूत्रपात के रूप में स्मरण करेंगी।

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