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RAJ RERA : गुरुग्राम के बिल्डर ने पैसे लेकर नहीं दिया फ्लैट का कब्जा, ब्याज समेत लौटाने होगी राशि

प्रकरण की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिनव शेखर ने तर्क दिया कि ग्राहक कब्जा लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान करना होगा। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि परियोजना वर्तमान में रहने योग्य स्थिति में नहीं है और बिल्डर ने अभी तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया है।
बिल्डर की ओऱ से रखा गया यह पक्षः
बिल्डर के वकील हार्दिक मिश्रा ने तर्क दिया कि देरी अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हुई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेत खनन पर प्रतिबंध, निर्माण गतिविधियों पर एनजीटी के आदेश, नोटबंदी और अन्य आवंटियों द्वारा बकाया भुगतान में देरी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, और कॉम्प्लीशन सर्टिफिकेट 2 सितंबर 2022 को प्राप्त कर लिया गया है।
रेरा अथॉरिटी का फैसलाः
सुनवाई के बाद रेरा अथॉरिटी के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने पाया कि बिल्डर द्वारा प्रस्तुत कॉम्प्लीशन सर्टिफिकेट आंशिक है और उसमें कई शर्तें हैं। इसके साथ ही, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करना अभी बाकी है, जो कि रेरा कानून के तहत अनिवार्य है। अथॉरिटी ने बिल्डर की ओर से किए गए अप्रत्याशित कारणों का दावा भी खारिज कर दिया और आदेश दिया कि बिल्डर शिकायतकर्ताओं को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद वैध कब्जे का प्रस्ताव दे। कब्जे में देरी के लिए 11.10% वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। …पूरा फैसला पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिए।
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