RAJ RERA: Gurugram builder took money but did not give possession of flat, will have to return the amount along with interest-m.khaskhabar.com
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RAJ RERA : गुरुग्राम के बिल्डर ने पैसे लेकर नहीं दिया फ्लैट का कब्जा, ब्याज समेत लौटाने होगी राशि

khaskhabar.com: शुक्रवार, 10 जनवरी 2025 1:59 PM (IST)
RAJ RERA : गुरुग्राम के बिल्डर ने पैसे लेकर नहीं दिया फ्लैट का कब्जा, ब्याज समेत लौटाने होगी राशि
भिवाड़ी। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने गुरुग्राम के बिल्डर के भिवाड़ी स्थित प्रोजेक्ट जेनिसिस स्काई हाइट्स परियोजना से संबंधित दो शिकायतों पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। रेरा सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने अपने आदेश में गुरुग्राम के बिल्डर स्वास्तिक होमबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ताओं को वैध कब्जे का प्रस्ताव देने के साथ-साथ कब्जे में देरी के लिए निर्धारित ब्याज 11.10 प्रतिशत राशि का भी भुगतान करे। प्रकरण के तथ्यों के मुताबिक पहली शिकायत हरियाणा के जींद निवासी संदीप कुमार द्वारा दर्ज की गई थी, जिन्होंने जेनिसिस स्काई हाइट्स परियोजना में फ्लैट नंबर बी-1201 बुक किया था। इसके लिए 17,65,225 रुपए के कुल बिक्री मूल्य पर उन्होंने 90% राशि यानी लगभग 16,64,783 रुपए का भुगतान कर दिया था। बिक्री समझौते (8 मई 2014) के अनुसार, बिल्डर को 36 महीने के भीतर (8 मई 2017 तक) फ्लैट का कब्जा देना था, लेकिन बिल्डर यह वादा पूरा करने में विफल रहा। दूसरी शिकायत उत्तराखंड के देहरादून निवासी नीलाभ अग्रवाल और अन्य द्वारा दर्ज की गई थी। उन्होंने फ्लैट नंबर ए-208 बुक किया था, जिसकी कुल कीमत 23,71,775 रुपए थी, और 90% राशि यानी 21,35,816 रुपए का भुगतान किया था। बिक्री समझौते के अनुसार, उन्हें 18 जून 2017 तक फ्लैट का कब्जा मिलना चाहिए था।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिनव शेखर ने तर्क दिया कि ग्राहक कब्जा लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान करना होगा। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि परियोजना वर्तमान में रहने योग्य स्थिति में नहीं है और बिल्डर ने अभी तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया है।
बिल्डर की ओऱ से रखा गया यह पक्षः
बिल्डर के वकील हार्दिक मिश्रा ने तर्क दिया कि देरी अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हुई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेत खनन पर प्रतिबंध, निर्माण गतिविधियों पर एनजीटी के आदेश, नोटबंदी और अन्य आवंटियों द्वारा बकाया भुगतान में देरी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, और कॉम्प्लीशन सर्टिफिकेट 2 सितंबर 2022 को प्राप्त कर लिया गया है।
रेरा अथॉरिटी का फैसलाः
सुनवाई के बाद रेरा अथॉरिटी के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने पाया कि बिल्डर द्वारा प्रस्तुत कॉम्प्लीशन सर्टिफिकेट आंशिक है और उसमें कई शर्तें हैं। इसके साथ ही, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करना अभी बाकी है, जो कि रेरा कानून के तहत अनिवार्य है। अथॉरिटी ने बिल्डर की ओर से किए गए अप्रत्याशित कारणों का दावा भी खारिज कर दिया और आदेश दिया कि बिल्डर शिकायतकर्ताओं को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद वैध कब्जे का प्रस्ताव दे। कब्जे में देरी के लिए 11.10% वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। पूरा फैसला पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिए।

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