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ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अत्यंत आवश्यक: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल

khaskhabar.com: सोमवार, 19 जनवरी 2026 5:55 PM (IST)
ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अत्यंत आवश्यक: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल
शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को केवल उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की प्रतिभा में होने वाले निखार से आंका जाना चाहिए। यह बात राज्यपाल ने जिला शिमला के रामपुर उप-मंडल के सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ एजुकेशन नोगली में स्नातक पाठ्यक्रमों के शुभारंभ के उपरांत एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक और उनका प्रशिक्षण छात्रों के भविष्य को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सच्ची शिक्षा वही है, जो विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनने तथा राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ा होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में ‘गुरु’ की जगह ‘शिक्षक’ शब्द का उपयोग होने लगा है, लेकिन भारतीय परंपरा में गुरु को हमेशा समाज का मार्गदर्शक माना गया है। उन्होंने भगवान श्रीराम और श्री कृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी गुरु-शिष्य परंपरा का पालन किया और अपने गुरुओं की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात किया। उन्होंने कहा कि जब शिष्य श्रद्धा और ईमानदारी से गुरु का अनुसरण करता है, तो सफलता अपने आप मिलती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को भारत के महान विचारकों और नेताओं से जुड़ने का अवसर देती है और उनमें मूल्य तथा नैतिकता का विकास करती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को सुरक्षित रखने के लिए नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि यह संस्थान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम पर है, जो एक महान शिक्षाविद् और भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे। उनका मानना था कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि चरित्र निर्माण करने वाले शिल्पकार भी होते हैं। उन्होंने कॉलेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों को डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों को अपनाने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने कहा कि स्नातक पाठ्यक्रमों की शुरुआत से क्षेत्र के विद्यार्थियों को घरद्वार के निकट उच्च शिक्षा उपलब्ध होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
इससे पूर्व, संस्थान के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मुकेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने नए पाठ्यक्रमों बी.ए., बी.एससी. और बी.कॉम. के बारे में अवगत करवाते हुए कहा कि इस संस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।
कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. सीमा भारद्वाज ने भी राज्यपाल का स्वागत किया।
इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनमें रामायण पर आधारित एक भावनात्मक नृत्य नाटिका भी शामिल थी।
राज्यपाल ने डॉ. मुकेश कुमार और डॉ. सीमा भारद्वाज द्वारा लिखित ‘असेसमेंट ऑफ लर्निंग’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने विभिन्न संस्थानों, सामाजिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों और मेधावी छात्रों को सम्मानित भी किया।
इससे पूर्व, स्थानीय किसानों-बागवानों ने भी राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, जिला प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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