Promises to employees, talks and arrests too, where is the justice in this: Kumari Selja-m.khaskhabar.com
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कर्मचारियों से वादा, बातचीत भी और गिरफ्तारी भी, यह कहां का इंसाफ : कुमारी सैलजा

khaskhabar.com: शनिवार, 22 अगस्त 2026 1:52 PM (IST)
कर्मचारियों से वादा, बातचीत भी और गिरफ्तारी भी, यह कहां का इंसाफ : कुमारी सैलजा
खास खबर। सिरसा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और शहरों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों से बातचीत और उनकी मांगों के समाधान की बात करती है, दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों और उनके नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है। आखिर यह कहां का इंसाफ है? सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय कर्मचारियों की जायज मांगों का सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश के अनेक शहरों में करीब 17 दिन तक कूड़ा नहीं उठने से हालात गंभीर बने रहे। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, दुर्गंध और गंदगी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हुआ। सरकार की पहली जिम्मेदारी थी कि वह समय रहते कर्मचारियों से संवाद करती और ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होने देती कि शहरों में हजारों टन कचरा जमा हो जाए।
सांसद ने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि कर्मचारी हड़ताल पर क्यों गए, बल्कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जिन मांगों पर पहले सहमति बनी थी, उन्हें समय पर लागू क्यों नहीं किया गया? यदि सरकार ने कर्मचारियों के साथ किए गए वादों को पूरा किया होता और लिखित आदेश जारी कर दिए होते तो शायद कर्मचारियों को हड़ताल जैसा कदम उठाने की नौबत ही नहीं आती।
कुमारी सैलजा ने कहा कि 17 दिनों तक आम जनता गंदगी और दुर्गंध से परेशान रही, लेकिन शासन-प्रशासन प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं बना सका। अब कुछ स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी में कचरा उठाया जा रहा है। कचरा उठना आवश्यक है और जनता को साफ-सफाई मिलनी ही चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि कर्मचारियों की समस्याओं और जायज मांगों का समाधान किया जाए। केवल पुलिसबल के सहारे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
सांसद ने सवाल किया कि जब 17 दिन बाद कचरा उठाने की व्यवस्था की जा सकती है तो यह व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई? सरकार ने इतने दिनों तक कर्मचारियों के साथ गंभीर वार्ता क्यों नहीं की? जिन मांगों पर पहले सहमति बनी थी, उनके आदेश जारी करने में क्या बाधा है? और जब सरकार स्वयं बातचीत के लिए कर्मचारी नेताओं को बुला रही है तो दूसरी ओर कर्मचारियों को हिरासत में लेने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
कुमारी सैलजा ने कहा कि पूरे हरियाणा में लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा पैदा होना गंभीर चिंता का विषय है। सफाई व्यवस्था किसी राजनीतिक दल या सरकार का विषय नहीं, बल्कि सीधे जनता के स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए नगर निकायों में ऐसी स्थायी व्यवस्था बनानी चाहिए कि भविष्य में किसी विवाद के कारण आम नागरिकों को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनना और जनता को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना दोनों सरकार की जिम्मेदारी हैं। कर्मचारियों और जनता को आमने-सामने खड़ा करने के बजाय सरकार को संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालना चाहिए। वादे करना, फिर उन्हें पूरा न करना, बातचीत के लिए बुलाना और दूसरी ओर कर्मचारी नेताओं को हिरासत में लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के साथ सार्थक बातचीत कर पहले से सहमत मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय लिया जाए, हिरासत में लिए गए कर्मचारी नेताओं के प्रति अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई से बचा जाए और प्रदेश के सभी शहरों में जमा कचरे को तत्काल उठवाकर सफाई व्यवस्था सामान्य की जाए। सरकार की प्राथमिकता टकराव नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा होनी चाहिए।

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