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18 अगस्त तक समाधान नहीं तो 24 अगस्त को यमुना प्राधिकरण पर होगी महापंचायत: भारतीय किसान यूनियन

भाकियू के जिला मीडिया प्रभारी सुनील प्रधान ने बताया कि तिरंगा यात्रा के जरिए सरकार को यह संदेश दिया गया है कि किसान अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं। किसानों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के साथ-साथ प्रभावित किसानों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए और वर्षों से लंबित मामलों का जल्द निस्तारण किया जाना चाहिए। किसानों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का भुगतान प्रमुख मांगों में शामिल है। इसके अलावा आबादी, लीजबैक और शिफ्टिंग से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण की मांग की गई है।
किसानों ने 10 प्रतिशत आवासीय भूखंड की नीति लागू करने की भी मांग उठाई है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षेत्र के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और किसानों के कर्ज माफ किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। किसान नेताओं का कहना है कि जमीन अधिग्रहण और क्षेत्र में तेजी से हो रहे औद्योगिक एवं शहरी विकास का सीधा प्रभाव स्थानीय किसानों और उनके परिवारों पर पड़ा है। ऐसे में उनके आर्थिक और सामाजिक हितों की सुरक्षा जरूरी है। किसान नेताओं ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। गांव-गांव जाकर किसानों को आंदोलन से जोड़ने और आगामी महापंचायत को सफल बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
--आईएएनएस
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