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जेलों की सुरक्षा से समझौता नहीं, आधुनिक तकनीक से मजबूत होगी पहरेदारी : डॉ. अरविंद शर्मा

इस तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए पारंपरिक मोबाइल जैमर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जेल परिसर में विशेष टावर लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से वहां मौजूद मोबाइल फोन को लक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाता है। इससे जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह बाधित किए बिना अवैध फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।
अंबाला में सफल प्रयोग के बाद अन्य जेलों में विस्तार
जेल विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से अंबाला जेल को इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना था। यहां प्रणाली की कार्यप्रणाली, नेटवर्क कवरेज और अवैध मोबाइल के इस्तेमाल को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। पायलट प्रोजेक्ट के संतोषजनक परिणामों के बाद अब प्रदेश की अन्य जेलों में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
टावर आधारित प्रणाली के माध्यम से जेल परिसर में मौजूद अवैध मोबाइल फोन की कॉल और इंटरनेट सेवाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे जेल से बाहर होने वाले अनधिकृत संपर्क पर अंकुश लगाने में जेल प्रशासन को मदद मिलेगी। खास तौर पर उन परिस्थितियों में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां बंदी जेल के भीतर से बाहरी लोगों से संपर्क करने का प्रयास करते हैं।
हरियाणा जेल विभाग पारंपरिक तलाशी और निगरानी व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक को जोड़कर जेलों की सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। अंबाला में सफल प्रयोग के बाद अन्य जेलों में इस प्रणाली की आवश्यकता और तकनीकी परिस्थितियों का आकलन कर इसके विस्तार की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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