New revelation in alleged fraudulent sale of agricultural land worth crores: Cheque payment shown in registry never cleared by bank-m.khaskhabar.com
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करोड़ों की कृषि भूमि के कथित फर्जी बेचान मामले में नया खुलासा, रजिस्ट्री में दिखाया चेक भुगतान बैंक में नहीं हुआ क्लियर

khaskhabar.com: रविवार, 30 अगस्त 2026 3:19 PM (IST)
करोड़ों की कृषि भूमि के कथित फर्जी बेचान मामले में नया खुलासा, रजिस्ट्री में दिखाया चेक भुगतान बैंक में नहीं हुआ क्लियर
भीलवाड़ा। सुवाणा कस्बे स्थित उपासरा यति श्री केसरी चंद संपत्ति ट्रस्ट, शांतिनाथ जैन मंदिर सांगानेरी गेट कसारा बाजार भीलवाड़ा की करोड़ों रुपये मूल्य की करीब दो बीघा कृषि भूमि के कथित फर्जी बेचान मामले में पुलिस जांच के दौरान नया खुलासा सामने आया है। जांच में यह बात सामने आई है कि जमीन की रजिस्ट्री में लाखों रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाना दर्शाया गया था, लेकिन उक्त चेक की राशि आज तक बैंक में क्लियर नहीं होने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी एवं सुभाष नगर थाना प्रभारी कैलाश विश्नोई के अनुसार, मामले की जांच में रजिस्ट्री में दर्शाए गए चेक भुगतान की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि जमीन खरीदने वाले मुन्ना मोहम्मद द्वारा रजिस्ट्री में लाखों रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से करना दर्शाया गया, जबकि संबंधित राशि का चेक बैंक में क्लियर नहीं हुआ। पुलिस इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से भी चर्चा कर रही है। इधर, मामले में आरोपी बताए जा रहे मुन्ना मोहम्मद ने उपखंड अधिकारी भीलवाड़ा के समक्ष आरटी एक्ट की धारा 53, 54 एवं 188 तथा राजस्थान टेनेंसी एक्ट की धारा 212 के तहत सुवाणा निवासी प्रकाश चपलोत, तहसीलदार भीलवाड़ा एवं उप पंजीयक भीलवाड़ा के खिलाफ वाद दायर किया है। वाद में आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर प्रकाश चपलोत द्वारा अवैध कब्जा किया गया है।
वहीं ट्रस्ट अध्यक्ष नेम कुमार संघवी के नेतृत्व में मंत्री पारसमल कोठारी एवं जैन समाज सुवाणा के उपाध्यक्ष प्रकाश चपलोत जैन ने जिला कलेक्टर के समक्ष अपील प्रस्तुत कर राजस्थान लैंड रेवेन्यू एक्ट की धारा 75 के तहत 27 जनवरी 2026 को खोले गए नामांतरण एवं इंतकाल को निरस्त करने की मांग की है।
अपील में बताया गया कि सुवाणा स्थित आराजी संख्या 1985, रकबा 0.5564 हेक्टेयर कृषि भूमि जिला कलेक्टर के माध्यम से तहसीलदार भीलवाड़ा के अधिपत्य में बताई गई है। साथ ही आरोप लगाया गया कि यति केसरी चंद गुरु जड़ावचंद का निधन लगभग 70 वर्ष पूर्व हो चुका है, इसके बावजूद उनके नाम से कथित रूप से फर्जी आधार एवं पैन कार्ड तैयार किए गए और इसी आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवाया गया।
मामले में ट्रस्ट पदाधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की भूमि के बेचान और राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण किए जाने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि गंभीर आरोपों के बावजूद मामले से जुड़े आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच एवं कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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