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मदर्स डे विशेष : सबका ख्याल रखने वाली मां का ख्याल कौन रखेगा?—पीढ़ियों को संवारने वाली मूक शक्ति पर एक विचार

khaskhabar.com: शनिवार, 09 मई 2026 2:51 PM (IST)
मदर्स डे विशेष : सबका ख्याल रखने वाली मां का ख्याल कौन रखेगा?—पीढ़ियों को संवारने वाली मूक शक्ति पर एक विचार
सोनल अग्रवाल रावत, फाउंडर्स मदर्सवाइब (MothersVibe) नई दिल्ली। मातृत्व (मदरहुड) को अक्सर बिना शर्त प्यार, त्याग और अंतहीन देखभाल के रूप में परिभाषित किया जाता है। लेकिन हर मुस्कुराती हुई पारिवारिक तस्वीर के पीछे एक ऐसी महिला होती है, जो चुपचाप उन भावनात्मक जिम्मेदारियों को उठाती है जिन पर अक्सर किसी का ध्यान ही नहीं जाता। घर और करियर को संभालने से लेकर बच्चों की परवरिश करने और रिश्तों को संजोने तक, माताएं बिना रुके अनगिनत भूमिकाओं में संतुलन बनाए रखती हैं। यही कारण है कि इस मदर्स डे पर हमारा ध्यान केवल माताओं का उत्सव मनाने पर ही नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से समझने और सहयोग देने पर होना चाहिए।
भावनात्मक कल्याण (इमोशनल वेलनेस) और पेरेंटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक दौर में मातृत्व भावनात्मक रूप से पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो चुका है। आज की माताएं ऐसे दौर में बच्चों की परवरिश कर रही हैं जो डिजिटल विकर्षणों (डिजीटल डिस्ट्रैक्शन), भावनात्मक अलगाव, सामाजिक तुलना, तनाव और "सब कुछ परफेक्ट करने" के चौतरफा दबाव से घिरा हुआ है।
अनेक महिलाएं आज मानसिक थकावट (इमोशनल बर्नआउट), 'मॉम गिल्ट' (दोषबोध), अकेलेपन, एंग्जायटी, अपनी पहचान खोने के डर और वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ने जैसी समस्याओं से अकेले ही जूझ रही हैं। हमारा समाज अक्सर "मजबूत महिलाओं" की तारीफ तो बहुत करता है, लेकिन बहुत कम लोग रुककर यह महत्वपूर्ण सवाल पूछते हैं—"जो महिला सबका ख्याल रखती है, आखिर उसका ख्याल कौन रखता है?"
मदर्सवाइब की संस्थापक सोनल अग्रवाल रावत का मानना है कि बच्चे केवल बातों या सीख से नहीं सीखते, बल्कि वे अपने आसपास के भावनात्मक माहौल को गहराई से महसूस कर अवशोषित करते हैं। एक मां का अपना मानसिक स्वास्थ्य, उसका आत्मविश्वास, शांति और विपरीत परिस्थितियों से उबरने की क्षमता (रेजिलिएंस) ही उसके बच्चे की भावनात्मक नींव तय करती है। इसीलिए, जब माताओं को भावनात्मक सहयोग मिलता है, तो वे एक भावनात्मक रूप से सुरक्षित परिवार और मजबूत बच्चों का निर्माण करती हैं।
भारतीय संस्कृति के महान सूत्र "मातृ देवो भव" (मां ही देवतुल्य है) का संदर्भ देते हुए वे कहती हैं कि आज की कई महिलाएं वास्तव में खुद को सम्मानित या भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं कर पातीं। इसके विपरीत, वे खुद को थकी हुई, तनाव से दबी हुई और बिना किसी भावनात्मक सहयोग के सिर्फ जिम्मेदारियां निभाते रहने के दबाव में पाती हैं।
सोनल इस बात पर जोर देती हैं कि आज माताओं को बिना किसी अपराधबोध (गिल्ट) के आराम करने, बेझिझक मदद मांगने, अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने, थोड़ा रुकने, मानसिक रूप से खुद को संभालने और अपनी जिम्मेदारियों से परे जाकर खुद को दोबारा तलाशने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
वे मातृत्व को नेतृत्व (लीडरशिप) के सबसे शुद्ध रूप में देखती हैं। माताएं बच्चों को किताबी ज्ञान से बहुत पहले भावनात्मक बुद्धिमत्ता (इमोशनल इंटेलिजेंस), संयम, प्रेम और जीवन के मूल्य सिखा देती हैं। कठिन दौर में भी उनका व्यवहार और उनकी प्रतिक्रियाएं आने वाली पीढ़ी के भविष्य को आकार देती हैं।
वे आगे कहती हैं कि यदि एक समाज के तौर पर हम सचमुच भावनात्मक रूप से स्वस्थ बच्चे और मजबूत परिवार चाहते हैं, तो माताओं के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को केवल एक दिन (मदर्स डे) नहीं, बल्कि साल के हर दिन प्राथमिकता देनी होगी।
यह आलेख सभी माताओं को यह याद दिलाने का प्रयास करता है कि वे "सिर्फ एक मां" नहीं हैं, बल्कि वे अपनी ममता, ऊर्जा और आंतरिक शक्ति से पीढ़ियों के भावनात्मक भविष्य को संवारने वाली सूत्रधार हैं।
मदर्सवाइब कम्युनिटी (MothersVibe Community) के जरिए सोनल अग्रवाल रावत महिलाओं और परिवारों को भावनात्मक जागरूकता, कल्याण और एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक सुरक्षित मंच प्रदान कर रही हैं। माता-पिता बच्चों को भावनात्मक रूप से सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाने के लिए 'मदर्सवाइब पेरेंटिंग ई-बुक' (MothersVibe Parenting E-Book) के माध्यम से मुफ्त पेरेंटिंग गाइड भी प्राप्त कर सकते हैं।

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