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अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा : सुप्रीम कोर्ट

इसमें आगे कहा गया है कि ऐसे आउटलेट अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं और आम जनता को कानूनी घटनाक्रमों और अदालती फैसलों के बारे में जानकारी दे सकते हैं। ऐसी रिपोर्टिंग के दौरान अदालती कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
संक्षेप में भले ही समाचार माध्यम अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रखें, फिर भी वे पैराग्राफ 10 में बताई गई पाबंदियों से बंधे रहेंगे। इसके अनुसार, शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके 24 जुलाई के आदेश का पैराग्राफ 11 "उस हद तक स्पष्ट हो गया है"।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने प्रतिवादियों को अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर के लिए तय की।
इससे पहले, 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निकाला, फैलाया, उससे पैसे कमाए, पोस्ट, री-पोस्ट, अपलोड, ट्रांसमिट, उसमें बदलाव, स्टोर या होस्ट नहीं किया जा सकता है।
यह अंतरिम निर्देश रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए और सभी हाईकोर्ट के साथ-साथ प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों और टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म को कार्यवाही में पक्षकार बनाते हुए जारी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह नोडल मंत्रालयों के जरिए एक प्रस्ताव तैयार कर कोर्ट के सामने पेश करे। इस प्रस्ताव का मकसद याचिका में मांगी गई राहतों को लागू करना था। साथ ही, कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा कि वे कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए 'मॉडल रूल्स' को अपनाने के बारे में स्टेट्स रिपोर्ट दें, जिसमें लगातार और बिना रुकावट के लाइव स्ट्रीमिंग की संभावना पर भी जानकारी शामिल हो।
--आईएएनएस
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