आजम खान और अब्दुल्ला आजम को अदालत से बड़ा झटका, सेशन कोर्ट में दायर याचिका खारिज

इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर, 2025 को आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को दोषी ठहराया था। दोनों को 7-7 साल की कैद और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। इसके बाद से दोनों जेल में बंद हैं।
इसके बाद दोनों की तरफ से सत्र न्यायालय में सजा को चुनौती दी गई। 6 अप्रैल, 2026 को सुनवाई समाप्त हुई और न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 20 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की थी।
मामले को लेकर अब्दुल्ला आजम सुप्रीम कोर्ट भी गए थे और याचिका दायर की थी कि पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अब्दुल्ला आजम की एफआईआर को रद्द करने की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जाली जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने और बाद में पासपोर्ट लेने के लिए उसका उपयोग करना ‘अलग-अलग कृत्य’ हैं।
अब्दुल्ला आजम को इससे पहले एक अन्य मामले में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि पासपोर्ट उसी जाली प्रमाण पत्र के आधार पर जारी किया गया था, इसलिए बाद में मुकदमा चलाना दोहरी सजा के बराबर है।
--आईएएनएस
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