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ब्यावर पुलिस का बड़ा एक्शन: क्रिप्टोकरंसी और हवाला की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश, 4 आरोपी गिरफ्तार

ई-मित्र खाते में आई ठगी की रकम से खुला मामला
ब्यावर एसपी रतनसिंह ने बताया कि मामले की शुरुआत थाना जवाजा में ई-मित्र संचालक तुलसा सिंह की रिपोर्ट से हुई। सारोठ चौराहा स्थित उसकी ई-मित्र दुकान पर 28 अगस्त को तीन युवक थार वाहन से पहुंचे। इनमें रितिक नामक युवक को दुकान पर काम करने वाला यश पहले से जानता था। युवकों ने नकद राशि उपलब्ध होने के बारे में पूछा और ई-मित्र लेनदेन में इस्तेमाल होने वाला क्यूआर कोड ले लिया।
कुछ समय बाद खाते में ज्योति कुमारी के नाम से 30 हजार रुपये आए। ई-मित्र संचालक ने 300 रुपये कमीशन काटकर 29,700 रुपये युवकों को दे दिए। इसके बाद सुशीला के नाम से 50 हजार रुपये खाते में आए और 500 रुपये कमीशन काटकर 49,500 रुपये नकद दे दिए गए।
अगले दिन खाते पर दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा की ओर से रोक लगा दी गई। बैंक से जानकारी करने पर पता चला कि खाते में साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा हुई थी। इस पर थाना जवाजा में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पूछताछ में सामने आया विदेश से जुड़ा नेटवर्क
जांच के दौरान जिला विशेष टीम, साइबर टीम और जवाजा थाना पुलिस ने संदिग्धों को एक स्विफ्ट कार में घूमते हुए पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक एप के माध्यम से विदेश में बैठे अज्ञात साइबर ठगों के समूह से जुड़े हुए हैं।
साइबर ठग भारतीय लोगों को धमकी, लालच अथवा निवेश का झांसा देकर रकम ऐसे खातों में जमा करवाते हैं, जिनका उपयोग आगे गिरोह के सदस्य करते हैं। आरोपियों को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी के बदले निर्धारित मूल्य से करीब 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलने की बात भी सामने आई है।
ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों को बनाते थे निशाना
गिरोह के सदस्य ऐसे ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों की तलाश करते थे, जहां डिजिटल लेनदेन के बाद नकद राशि उपलब्ध हो सके। वे क्यूआर कोड लेकर संबंधित खाते में साइबर ठगी की रकम डलवाते और कमीशन काटकर नकदी प्राप्त कर लेते थे।
इसके बाद जब पीड़ित की शिकायत पर बैंक खाता रोक दिया जाता था, तो खाते के वास्तविक संचालक को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। इस तरह साइबर ठगी की रकम को नकदी में बदलने के लिए आम लोगों के खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
नकदी से खरीदते थे क्रिप्टोकरेंसी
जांच में सामने आया कि प्राप्त नकदी से क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी खरीदी जाती थी। इसके बाद इसे डिजिटल माध्यम से विदेश में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस माध्यम से विदेश से संचालित साइबर ठगी और हवाला कारोबार के बीच भी धन के लेनदेन को अंजाम दिया जा रहा था।
पुलिस ने मामले में अजमेर निवासी पेशे से मजदूर राजवीर सिंह चौहान उर्फ रोहित (24), रितिक मंडोलिया (23), त्रिलोक रेगर (23) और व्यापारी चिराग मुलचंदानी (26) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से साइबर ठगी के नेटवर्क, इस्तेमाल किए गए खातों, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन तथा विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से संबंधों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
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