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सरकारी मदद की आस में ही टूट गई सांसों की डोर

khaskhabar.com: गुरुवार, 02 फ़रवरी 2017 10:23 PM (IST)
सरकारी मदद की आस में ही टूट गई सांसों की डोर
उदयपुर। दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर जिले में सरकारी तंत्रों की आमजन के साथ होने वाली बेकद्री की वजह से एक युवक की सांसों की डोर टूट गई। महिनों तक मदद की आस में बैठे रहे परिजनों ने अपने लाड़ले को नम आंखों से विदाई दी और सरकार के प्रति गुस्सा दिखाते हुए शव के साथ ही सरकारी आश्वासनों के कागजों को ही जला दिया। दरअसल उमेश चौहान की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, उसकी बहन किडनी देने को तैयार थी, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाखों रुपए की जरूरत थी। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने की वजह से समाज जनों ने कुछ आर्थिक मदद की, पर यह इलाज के लिए नाकाफी था। ऐसे में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे उमेश चौहान और उसके परिजन मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसद से सरकार स्तर पर मदद की मांग करते रहे। चार महिनों में मुख्यमंत्री और सांसद को कई पत्र लिखे। मामला पत्र व्यवहार तक ही रह गया और उमेश जिंदगी की जंग हार गया।

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