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काशीवासियों ने किया साइबेरियन पक्षियों का स्वागत, बढ़ी मां गंगा की रौनक

एक अन्य निवासी ने कहा कि चार महीने के लिए ये पक्षी लंबी यात्रा करके काशी पहुंचे हैं और उनके आते ही काशी का रूप बदल जाता है। हम नाविक समाज से आते हैं और उनके आने की वजह से मां गंगा की शोभा बढ़ जाती है और पर्यटक भी उनके साथ फोटो क्लिक कराते हैं, लेकिन चाइनीज मांझे की वजह से कुछ परिंदों की मौत हो जाती है, तो बहुत दुख होता है। ये पक्षी काशी के लिए सौभाग्य हैं, क्योंकि उन्होंने रहने के लिए सिर्फ काशी को चुना है। हम सभी लोग अपने हाथों से उन्हें खाना खिलाते हैं और ये बहुत प्यार से खाना भी खाते हैं।
बता दें कि साइबेरियन क्रेन हर साल अक्टूबर के महीने में लंबी यात्रा करके वाराणसी पहुंचते हैं और मार्च के महीने तक गंगा में निवास करते हैं। ये पक्षी मध्य एशिया और पाकिस्तान से होकर 5000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए बनारस आते हैं। चार महीने साइबेरियन क्रेन अब गंगा किनारे रेत में अंडे भी देंगे और गंगा में अठखेलियां कर पर्यटकों को लुभाने में मदद भी करेंगे।
साइबेरिया में अक्टूबर और आने वाले महीनों में हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ती है, जिसकी वजह से ये पक्षी अपना जीवन व्यापन वहां नहीं कर पाते और बनारस में गंगा को अपना निवास स्थान चुनते हैं।
--आईएएनएस
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