Kashi residents welcomed Siberian birds, enhancing the beauty of Mother Ganga.-m.khaskhabar.com
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काशीवासियों ने किया साइबेरियन पक्षियों का स्वागत, बढ़ी मां गंगा की रौनक

khaskhabar.com: गुरुवार, 13 नवम्बर 2025 3:03 PM (IST)
काशीवासियों ने किया साइबेरियन पक्षियों का स्वागत, बढ़ी मां गंगा की रौनक
वाराणसी । हर साल की तरह इस साल भी बनारस की शोभा बढ़ाने के लिए विदेशी पक्षी साइबेरियन क्रेन बनारस के घाटों में आना शुरू हो चुके हैं। साइबेरियन क्रेन न सिर्फ घाटों की रौनक बढ़ा रहे हैं, बल्कि पर्यटकों को लुभाने का काम कर रहे हैं। विदेशी पक्षियों के आगमन से काशीवासी भी खुशी हैं और उन्हें दाना खिलाकर खुले दिल से उनका स्वागत कर रहे हैं। गंगा तट पर साइबेरियन पक्षियों के आने के बाद काशी के निवासियों ने आईएएनएस को बताया, "सर्दियों की शुरुआत के साथ ही साइबेरियन पक्षी वाराणसी पहुंच जाते हैं, जिससे घाटों की शोभा बढ़ जाती है। वे गंगा में तैरती मोतियों की माला जैसे दिखते हैं और पर्यटक उनके साथ तस्वीरें और वीडियो लेने का आनंद लेते हैं। उनके आगमन से शहर में खुशी का माहौल है और स्थानीय लोग उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें कोई परेशानी न हो।
एक अन्य निवासी ने कहा कि चार महीने के लिए ये पक्षी लंबी यात्रा करके काशी पहुंचे हैं और उनके आते ही काशी का रूप बदल जाता है। हम नाविक समाज से आते हैं और उनके आने की वजह से मां गंगा की शोभा बढ़ जाती है और पर्यटक भी उनके साथ फोटो क्लिक कराते हैं, लेकिन चाइनीज मांझे की वजह से कुछ परिंदों की मौत हो जाती है, तो बहुत दुख होता है। ये पक्षी काशी के लिए सौभाग्य हैं, क्योंकि उन्होंने रहने के लिए सिर्फ काशी को चुना है। हम सभी लोग अपने हाथों से उन्हें खाना खिलाते हैं और ये बहुत प्यार से खाना भी खाते हैं।
बता दें कि साइबेरियन क्रेन हर साल अक्टूबर के महीने में लंबी यात्रा करके वाराणसी पहुंचते हैं और मार्च के महीने तक गंगा में निवास करते हैं। ये पक्षी मध्य एशिया और पाकिस्तान से होकर 5000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए बनारस आते हैं। चार महीने साइबेरियन क्रेन अब गंगा किनारे रेत में अंडे भी देंगे और गंगा में अठखेलियां कर पर्यटकों को लुभाने में मदद भी करेंगे।
साइबेरिया में अक्टूबर और आने वाले महीनों में हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ती है, जिसकी वजह से ये पक्षी अपना जीवन व्यापन वहां नहीं कर पाते और बनारस में गंगा को अपना निवास स्थान चुनते हैं।
--आईएएनएस

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