Jaipur Municipal Corporation fined ₹8 crore, Rajasthan Pollution Control Board imposed fine on the orders of NGT!-m.khaskhabar.com
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Mar 5, 2024 1:39 pm
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ठोस कचरा प्रबंधन में लापरवाही करने पर जयपुर निगम ग्रेटर पर लगा ₹8 करोड़ का जुर्माना, एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई

khaskhabar.com : सोमवार, 12 फ़रवरी 2024 10:35 AM (IST)
ठोस कचरा प्रबंधन में लापरवाही करने पर जयपुर निगम ग्रेटर पर लगा ₹8 करोड़ का जुर्माना, एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई
जयपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बरतने पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेशों पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर पर ₹8 करोड़ का जुर्माना लगाया है। सुनवाई के दौरान राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता रोहित शर्मा ने तर्क दिया कि राजस्थान सरकार पर किसी भी दंड का भार नहीं डाला जा सकता क्योंकि 3000 करोड़ रुपये के दंड आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा राखी है। इसलिए जब तक सुप्रीम कोर्ट मामले का फैसला नहीं दे दे तब तक जयपुर नगर निगम पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।

लेकिन, अधिवक्ता अशोक मलिक ने तर्क दिया कि राजस्थान की सभी नगर पालिकाओं द्वारा राहत पाने के लिए इस मामले का हवाला देना दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में रद्द करने की याचिका दायर करेंगे क्योंकि अधिकारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "केवल जयपुर ही नहीं, पूरे राजस्थान में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति खराब है। एनजीटी और राजस्थान उच्च न्यायालय के इतने आदेशों के बाद भी अधिकारी नहीं सुन रहे हैं जिससे जनता को तमाम स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।"

श्री मलिक ने आगे कहा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर अपने कर्तव्यों से नहीं बच सकते। उन्होंने यह भी बताया कि अजमेर में भी कचरा प्रबंधन खराब है और एनजीटी द्वारा मामले संख्या 15/2023 में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति में अगर सुप्रीम कोर्ट से रोक हटाई जाती है तो राजस्थान के वित्त पर भारी बोझ पड़ सकता है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि अधिकारी एनजीटी द्वारा पारित आदेश 606/2018 का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं, जो उचित कचरा प्रबंधन का आदेश देता है। जब भी एनजीटी इस मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है तो वे रोक आवेदन के साथ उपस्थित होते हैं।

अजमेर में भी कचरा प्रबंधन की बदहाली, एनजीटी के आदेशों की अवहेलना

एनजीटी ने अशोक मलिक बनाम आयुक्त अजमेर नगर निगम मामले (क्रमांक 15/2023) में दिसंबर 2023 तक कचरा प्रबंधन की समस्याओं का समाधान करने और 15 जनवरी 2024 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी अजमेर में कचरा प्रबंधन की स्थिति खराब है और एप्लिकेशन के जरिए की गई शिकायतों का समाधान नहीं हो रहा है। यह लापरवाही न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
स्वच्छता एप की शिकायतों पर भी लापरवाही, नागरिक परेशान
अजमेर में खराब कचरा प्रबंधन की समस्या न सिर्फ जमीनी हकीकत है बल्कि शिकायतों के निवारण में भी लापरवाही सामने आ रही है। अजमेर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया गया नागरिक एप्लिकेशन जिसका उद्देश्य शिकायतों का त्वरित समाधान करना है, वह भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। नगर निगम अधिकारी न तो जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं और न ही एप्लिकेशन के माध्यम से आने वाली शिकायतों का ही संज्ञान ले रहे हैं।

3000 करोड़ के जुर्माने पर से सटे हटने का खतरा
अशोक मलिक ने यह भी कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में सटे रद्द करने की याचिका दायर करेंगे क्योंकि अधिकारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अधिकारी इस रोक का दुरुपयोग कर रहे हैं और एनजीटी के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट उनके आवेदन पर सहमत होता है और रोक हटा देता है तो राज्य सरकार को ठोस और मलजल प्रबंधन के लिए अलग से ₹3000 करोड़ का बजट आवंटित करना पड़ सकता है, जिससे राज्य के वित्त पर भारी बोझ पड़ सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट में होगी। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट रद्द करने की याचिका स्वीकार करता है या नहीं और क्या इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

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