Jaipur Civic Body Elections 2026: Mali-Saini Community Outraged Over Ticket Denial-m.khaskhabar.com
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Oct 13, 2026 5:58 am
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जयपुर निकाय चुनाव 2026 : टिकट न मिलने से भड़का माली-सैनी समाज, सिविल लाइंस व किशनपोल में चुनाव बहिष्कार का ऐलान

khaskhabar.com: रविवार, 06 सितम्बर 2026 11:40 PM (IST)
जयपुर निकाय चुनाव 2026 : टिकट न मिलने से भड़का माली-सैनी समाज, सिविल लाइंस व किशनपोल में चुनाव बहिष्कार का ऐलान
जयपुर। राजस्थान नगर निकाय चुनाव की गहमागहमी के बीच राजधानी जयपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों के सामने नया सियासी संकट खड़ा हो गया है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व की अनदेखी का आरोप लगाते हुए माली-सैनी समाज ने सिविल लाइंस और किशनपोल विधानसभा क्षेत्रों में निकाय चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि इन दोनों क्षेत्रों में समाज के करीब 45 हजार मतदाता हैं, जो इस बार मतदान से दूरी बनाएंगे। समाज ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए आह्वान किया है कि यदि कोई मतदाता बूथ तक जाता भी है, तो वह किसी भी दल को वोट देने के बजाय 'नोटा' (NOTA) का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज कराए। 2020 में मिले थे 5 टिकट, इस बार शून्य: समाज में गहरा रोष माली-सैनी समाज के नेताओं के अनुसार, राजनीतिक दलों ने इस बार समाज की मजबूत भागीदारी को सिरे से दरकिनार कर दिया है:
पिछले चुनाव से तुलना: वर्ष 2020 के नगर निगम चुनाव में सिविल लाइंस क्षेत्र से कांग्रेस ने समाज को 4 और भाजपा ने 1 टिकट दिया था। यानी कुल 5 प्रत्याशी मैदान में उतारे गए थे।
इस बार एक भी टिकट नहीं: समाज का आरोप है कि बड़ी आबादी और निर्णायक वोट बैंक होने के बावजूद इस बार दोनों दलों में से किसी ने भी समाज के एक भी व्यक्ति को पार्षद का टिकट नहीं दिया।
45 हजार वोटों का गणित: कम मार्जिन वाले वार्डों में बिगड़ेंगे समीकरण
सोडाला स्थित स्वेज फार्म के एक निजी होटल में वरिष्ठ समाजसेवी अशोक कुमार पुष्प की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त बैठक में बहिष्कार का यह कड़ा फैसला लिया गया:
वोट बैंक का दावा: समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 हजार और किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में करीब 15 हजार माली-सैनी मतदाता हैं।
संस्थाओं का समर्थन: इस फैसले को जयपुर जिला माली-सैनी समाज संस्था और राजस्थान प्रदेश सैनी-माली महासभा का भी समर्थन मिला है। निकाय चुनाव में जीत-हार का अंतर बहुत मामूली (कुछ दर्जनों से सैकड़ों वोटों) का होता है, ऐसे में 45 हजार मतदाताओं की नाराजगी दोनों मुख्य दलों का चुनावी गणित बिगाड़ सकती है।
सड़कों पर उतरेंगे होर्डिंग, 10-10 युवाओं की टोलियां घर-घर करेंगी संपर्क
बहिष्कार के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए समाज ने संगठनात्मक स्तर पर आक्रामक रणनीति तैयार की है:
बैनर और होर्डिंग अभियान: दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अब तक 'प्रतिनिधित्व नहीं तो वोट नहीं' के संदेश वाले 50 होर्डिंग लगाए जा चुके हैं, जबकि गली-मोहल्लों में 200 अतिरिक्त होर्डिंग-बैनर लगाने की योजना है।
घर-घर जनसंपर्क टोली: प्रत्येक वार्ड में 10-10 युवा कार्यकर्ताओं की समर्पित टोलियां बनाई गई हैं। ये टोलियां घर-घर जाकर समाज के मतदाताओं से संवाद करेंगी और मतदान का बहिष्कार करने अथवा नोटा का विकल्प चुनने की अपील करेंगी।

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