Advertisement
खेजड़ी जैसे गंभीर मुद्दे पर संसद में चर्चा से सरकार का बचना दुर्भाग्यपूर्ण : कुलदीप इंदौरा

सांसद कुलदीप इंदौरा ने याद दिलाया कि वर्ष 1730 में माता अमृता देवी बिश्नोई और 363 बलिदानियों ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे, जिसने विश्व को पहला संगठित पर्यावरण आंदोलन दिया। “आज उसी भूमि पर, उसी विरासत के विपरीत, खेजड़ी का विनाश हो रहा है और सरकार इस पर संसद में चर्चा तक से बच रही है,” उन्होंने कहा।
सांसद इंदौरा ने बताया कि जब उन्हें सदन के भीतर इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, तो उन्होंने अन्य सांसदों के साथ मिलकर संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर खेजड़ी का मुद्दा उठाया। इस विरोध प्रदर्शन में सांसद बृजेंद्र ओला, मुरारी लाल मीणा, अमराराम, उम्मेदाराम बेनीवाल, वरिष्ठ नेता व सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, जयप्रकाश, सतपाल ब्रह्मचारी, अरुण चौधरी सहित हरियाणा एवं महाराष्ट्र के कई सांसदगण भी शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल एक दल या एक राज्य का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े राष्ट्रीय सरोकार का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में संतों, पर्यावरण प्रेमियों और आम नागरिकों द्वारा ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन चलाया जा रहा है, आमरण अनशन जारी हैं, लेकिन सरकार न तो जमीन पर समाधान दे रही है और न ही संसद में संवाद के लिए तैयार है।
कुलदीप इंदौरा ने कहा, “जब कोई विषय अविलंबनीय लोक महत्व का हो, जन-आंदोलन का रूप ले चुका हो और पर्यावरण व आजीविका से सीधे जुड़ा हो, तब उस पर चर्चा से इनकार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। यह केवल राजस्थान का नहीं, पूरे देश के पर्यावरण भविष्य का प्रश्न है।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार चाहे चर्चा से बचे, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इंदौरा ने कहा कि वे आने वाले दिनों में, सदन के भीतर और बाहर, हर लोकतांत्रिक माध्यम से खेजड़ी के संरक्षण और राजस्थान के लोगों के पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे।
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
श्री गंगानगर
Advertisement
राजस्थान से
सर्वाधिक पढ़ी गई
Advertisement
Traffic
Features




