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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : पहला सुख निरोगी काया, योग से नया जीवन पाया

khaskhabar.com : गुरुवार, 20 जून 2024 4:06 PM (IST)
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : पहला सुख निरोगी काया, योग से नया जीवन पाया
र्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अपने भाषण के दौरान प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने योग के कल्याणकारी लाभों तथा स्वास्थ्य के प्रति इसके समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। इस प्रस्ताव का सकारात्मक परिणाम मिला और संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2014 में एक प्रस्ताव पारित कर आधिकारिक तौर पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र ने उल्लेख किया है- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना के लिए मसौदा प्रस्ताव भारत द्वारा प्रस्तावित किया गया था और रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों द्वारा इसका समर्थन किया गया था। यह प्रस्ताव पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासभा के 69वें सत्र के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में पेश किया था, जिसमें उन्होंने कहा था- योग हमारी प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है।
योग मन और शरीर, विचार और क्रिया की एकता का प्रतीक है... एक समग्र दृष्टिकोण, जो हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए मूल्यवान है। योग केवल व्यायाम नहीं है; यह स्वयं के साथ, विश्व के साथ और प्रकृति के साथ एकता की भावना की खोज करने का एक तरीका है। हमारा स्वास्थ्य हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। हमारे पास यह पूंजी नहीं है तो बाकी सभी सुख सुविधाएं कोई मायने नहीं रखती। हम कुछ नहीं कर पाते हैं और डिप्रेशन तनाव, नकारात्मकता और अशक्ति के मकड़जाल में उलझ कर रह जाते हैं।
ऐसी ही मेरे स्वास्थ्य की दास्तां से आपको रूबरू करा रही हूं- बात 2001 से पहले की है जब मैं 38 साल की थी, आज मैं 63 साल की हूं। मेरा शरीर बीमारियों का पिटारा बन चुका था। वजन भी 72 kg था, हार्मोन असंतुलित हो गए थे, आर्थराइटिस से शरीर कमजोर हो गया था, माइग्रेन, साइटिका, ल्यूकोरिया, लगातार दो से तीन महीने तक ब्लीडिंग होने पर सेनेटरी पैड के यूज़ करने से छाले हो गए थे। बच्चे उस समय 10 और 14 साल के थे, परिवार का ध्यान नहीं दे पा रही थी।
मुझे सर्विस छोड़नी पड़ी। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था। नकारात्मकता व डिप्रेशन की शिकार हो गई थी। मैं क्या करूँ, कैसे करूँ, जिंदगी बोझ सी लगने लगी थी। ऐसे समय में एक ही ख्याल आता था- मैं मर जाऊं। जनवरी2001 में मेरा यूट्रस का ऑपरेशन हुआ इसके बाद 24 जुलाई 2001 को आर्ट ऑफ लिविंग का कोर्स किया। अंधेरे में रोशनी की किरण नजर आई। संकल्प व योग के जज्बे के साथ अपने जीवन को शुरू किया कि मुझे जीना है, स्वस्थ होकर कुछ करना है। मुझ में योग का जज्बा जागा। जीवन में त्याग, सेवा, समर्पण का समावेश हुआ, योग ने मुझे जीवन जीने का संबल दिया। मैं योग की गंगा में रोज डुबकियां लगाने लगी।
साल 2009 में ईश्वरीय अनुकंपा से महिला पतंजलि योग समिति की जिला संयोजिका बनने से मेरे योगमय जीवन में चार चांद लग गये। मैं स्वस्थ होती चली गई। साथ ही दूसरी महिलाओं को योग से जोड़ने के लिए संकल्पबद्ध हो गई। इस राह पर अकेली चली थी, कारवां जुड़ता गया। योग से मेरे संपूर्ण जीवन का रूपांतरण हो गया। मेरी अंतर्निहित शक्तियों जागृत हो गई। मुझे सब कुछ अच्छा लगने लगा। कहा गया है नजर बदली, नजारे बदल गए, किश्ती बदली किनारे बदल गए योग ने तो मेरी दुनिया ही बदल दी है।
आज योग के कारण मेरी अलग पहचान बन गई। बांसवाड़ा में योग की अलख जगने से बाबा रामदेव का 2018 में 24, 25 व 26 अप्रैल को बांसवाड़ा प्रवास पर मेरे निवास पर आशीर्वाद देने पधारे। उस समय में योग की शक्ति से 108 बार अनगिनत सूर्य नमस्कार करके बाबा जी की स्वागत की तैयारी में घर से निकलती थी, 16 से 18 घंटे बिना थके, बिना रुके काम करती थी। मेरे जीवन के इस चमत्कारिक परिवर्तन को मैं भी नहीं समझ पा रही थी। मुझे योग ने मानसिक व शारीरिक बीमारियों पर विजय दिलाई।
समाज के लिए....
नियमित 2009 से निशुल्क महिला योग शिविर चला रही हूं, गांव- गांव, बस्ती- बस्ती, बांसवाड़ा की सभी ग्रामीण विद्यालय, कॉलेज, कॉलोनी, मंदिर परिसर में योग शिविर लगा कर 10 हजार से भी ज्यादा बेटियों, महिलाओं व बच्चों के जीवन मे सकारात्मकता बदलाव आ चुका है। समाज की सभी बहनों को योग से योगिनी बनाने के लिए संकल्पबद्ध हूं।
आज कई समाज की बहने मुझसे जुड़ी है जिनकी शारीरिक व मानसिक समस्याओं का निराकरण योग से हुआ है। वर्तमान समय में बहने स्वस्थ और प्रसन्न इसी योग की शक्ति से सेवा कार्यों को गति दे पा रही हूं। सभी सेवा प्रकल्पों को योग के जज्बे की वजह से पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से निभा पा रही हूं। अपने जीवन को योग व सेवा के लिए समर्पित कर चुकी हूं। आइए, हम मिलकर इस योग यात्रा में शामिल होकर योग की पताका को विश्व में फहराएं।

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