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जेजेटी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : मानवीय अनुभव और वैश्विक चुनौतियां पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने किया मंथन

khaskhabar.com: शनिवार, 28 मार्च 2026 4:36 PM (IST)
जेजेटी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : मानवीय अनुभव और वैश्विक चुनौतियां पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने किया मंथन
झुंझुनू। श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला (JJT) विश्वविद्यालय और रामादेवी महिला पीजी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को भव्य समापन हुआ। "मानवीय अनुभव और वैश्विक चुनौतियां: एक बहु-विषयक दृष्टिकोण" विषय पर आधारित इस संगोष्ठी में स्वास्थ्य, एआई (AI), पर्यावरण और मानवीय मूल्यों जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रथम दिवस : स्वास्थ्य और प्रकृति के संतुलन पर जोर संगोष्ठी के पहले दिन मुख्य वक्ता डॉ. विषनावी डेसरआजू ने वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली और महामारियों के कारण प्रकृति के साथ हमारा संतुलन बिगड़ रहा है। एक स्वस्थ समाज की नींव रखने के लिए विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल बिठाना अनिवार्य है। वहीं, डॉ. निधि अग्रवाल ने डिजिटल क्रांति और एआई (AI) के प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि तकनीकी उन्नति के बीच मानवीय मूल्यों को सुरक्षित रखना आज की बड़ी चुनौती है।
द्वितीय दिवस : भाषा, संस्कृति और नैतिकता का संगम
संगोष्ठी के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने मानवीय संवेदनाओं के विभिन्न पहलुओं को छुआ:
डॉ. जितेंद्र भीमराव बगुल : इन्होंने भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाजों पर वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया।
डॉ. शिवाजी पाटिल: इन्होंने मानवीय मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. सीमा सहल : इन्होंने मानव जीवन में 'नैतिकता' और उसके व्यावहारिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
300 प्रतिभागी और 100 शोध पत्रों का वाचन
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. मधु गुप्ता ने किया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे अकादमिक आयोजनों की निरंतरता का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. धनेश कुमार मीणा ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि डॉ. नाजिया हुसैन ने तकनीकी सत्रों का कुशल प्रबंधन किया।
विशेष सांख्यिकी :
कुल प्रतिभागी : देशभर से 300 से अधिक विद्वान।
शोध पत्र : 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने नवीन शोध पत्रों का वाचन किया।
सराहनीय उपस्थिति : इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार, डॉ. पिंकी, डॉ. अंशु, डॉ. सुमिता, डॉ. सविता संगवान, डॉ. अनन्ता शांडिल्य, डॉ. अंजना शर्मा, डॉ. आशा मिश्रा और डॉ. रमाकांत शर्मा सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे। अंत में कुलसचिव ने सभी आगंतुकों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया।

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