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लंपी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित

बैठक में लंपी रोग के नियंत्रण और रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों के दायित्वों के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई जिसमें निर्धारित किया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के लिए आइसोलेशन केंद्र की स्थापना और संचालन, शेड, पानी, चारा तथा सफाई, वेक्टर कंट्रोल के लिए फॉगिंग, मृत पशुओं के शवों का सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण आदि कार्य पंचायतीराज विभाग तथा स्थानीय निकाय के हैं जबकि पशुओं के अंतर्राज्यीय और अंतर जिला आवागमन पर नियंत्रण, पशुपालन विभाग के साथ आवागमन के रास्तों पर चेक पोस्टों की स्थापना, पशु परिवहन की निगरानी तथा मानव संसाधनों की उपलब्धता, जिले में पशु हाट तथा पशु मेलों के आयोजन पर रोक, प्रशासन द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करना आदि गृह विभाग के दायित्व हैं।
बैठक में बताया गया कि गोपालन विभाग तथा आरसीडीएफ का दायित्व गौशालाओं में संधारित गौवंशीय पशुओं में रोग के नियंत्रण के लिए जैव सुरक्षा उपायों की पालना सुनिश्चित कराना, गौशालाओं तथा सहकारी समितियों में रोग के नियंत्रण तथा रोकथाम के लिए आवश्यक प्रचार प्रसार और जनजागरूकता फैलाना, रोग नियंत्रण तथा रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग, गौशाला प्रबंधन एवं अन्य हितधारकों के साथ समन्वय, आइसोलेशन सेंटर की व्यवस्था आदि का निर्वहन करना है। इसके अलावावन विभाग के प्रमुख दायित्वों में वन्य जीव क्षेत्र के लगभग 05 किलोमीटर की परिधि में टीकाकरण एवं अन्य रोग नियंत्रण कार्य हेतु समन्वय, वेक्टर कंट्रोल छिड़काव, फॉगिंग, प्रचार प्रसा तथा जनजागरूकता और वन क्षेत्र में मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण आदि आते हैं।
बैठक में गृह विभाग के संयुक्त सचिव सहित वन विभाग, पंचायतीराज विभाग, आरसीडीएफ, गोपालन तथा पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने लंपी रोग नियंत्रण के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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