Imposing the TET requirement on teachers with 20 years of service is unjust; the government must immediately withdraw this decision: Rao Narendra Singh-m.khaskhabar.com
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20 साल से सेवा दे रहे अध्यापकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण, सरकार तत्काल फैसला वापस ले: राव नरेंद्र सिंह

khaskhabar.com: बुधवार, 16 सितम्बर 2026 12:53 PM (IST)
20 साल से सेवा दे रहे अध्यापकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण, सरकार तत्काल फैसला वापस ले: राव नरेंद्र सिंह
चंडीगढ़। हरियाणा में वर्षों से सेवाएं दे रहे अध्यापकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET/HTET) की अनिवार्यता को लेकर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि 20-20 वर्ष से सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों से अब दोबारा पात्रता परीक्षा लेने का फैसला शिक्षकों के साथ न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन अध्यापकों की नियुक्ति सरकार द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियमों और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, उनकी वर्षों की सेवा और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि TET को लेकर 1 सितंबर 2025 के फैसले में दिशा-निर्देश दिए गए थे और 29 मई 2026 के निर्णय में TET हासिल करने की समय-सीमा को 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाया गया है। साथ ही, संबंधित सरकारों को TET नियमित रूप से, अधिमानतः वर्ष में दो बार आयोजित करने की बात कही गई है। राव नरेंद्र सिंह ने सवाल किया कि जिस शिक्षक ने अपनी नियुक्ति के समय सरकार द्वारा निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी कीं, चयन प्रक्रिया से गुजरकर नियुक्ति प्राप्त की और पिछले दो दशकों से लगातार बच्चों को पढ़ा रहा है, उससे अब अचानक नया टेस्ट लेकर सरकार क्या हासिल करना चाहती है? उन्होंने कहा कि शिक्षक की योग्यता केवल किसी एक परीक्षा से नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक योग्यता, चयन प्रक्रिया, वर्षों के अनुभव और विद्यार्थियों के प्रति उसकी सेवाओं से भी निर्धारित होती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर नियम लागू करने से पहले सरकार को उनके लंबे सेवाकाल, नियुक्ति की परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखना चाहिए। केंद्र सरकार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने भी 2009 के RTE कानून से पहले नियुक्त और 1 सितंबर 2025 को जिन शिक्षकों की पांच वर्ष से कम सेवा शेष थी, उन्हें TET के बिना सेवानिवृत्ति तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी है, हालांकि ऐसे शिक्षक TET हासिल किए बिना पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना और शिक्षकों की वास्तविक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाते हुए मानवीय और व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं और इस संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। दशकों तक सेवाएं देने वाले शिक्षकों को अनिश्चितता में डालने के बजाय सरकार को उनके अनुभव और सेवाकाल का सम्मान करते हुए समाधान निकालना चाहिए।

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