हिंदुस्तान जिंक की ऐतिहासिक पहल : चंदेरिया में शुरू हुई महिलाओं के नेतृत्व वाली तेजस्विनी ऑल-वुमन शिफ्ट

कोर प्रोसेस ऑपरेशंस: लीचिंग और प्यूरिफिकेशन (L&P) 1 और 2 जैसी महत्वपूर्ण यूनिट्स का संचालन।
मेंबर्स की जिम्मेदारी: मेंटेनेंस, सेफ्टी कार्य और प्लांट की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
नेतृत्व : इस पहल का नेतृत्व हाइड्रो प्लांट की मैनेजर तान्या सिंह कर रही हैं।
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जहां भारी उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी हमेशा सीमित रही है, वहीं हिंदुस्तान जिंक ने इसे चुनौती दी है:
सबसे अधिक भागीदारी : हिंदुस्तान जिंक के वर्कफोर्स में अब 26.3% महिलाएं हैं, जो इस सेक्टर में सर्वाधिक है।
वेदांता ग्रुप का विजन : कंपनी का लक्ष्य अपनी वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी को 35% तक ले जाना है।
"तेजस्विनी का लॉन्च इंडस्ट्रियल परफॉर्मेंस को पावर देने वाले कोर ऑपरेशनल रोल में महिलाओं के लिए अवसर देने की हमारी प्रतिबद्धता है। हम पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर एक भविष्य के लिए तैयार माइनिंग सेक्टर बना रहे हैं।"
— अरुण मिश्रा, सीईओ एवं होल-टाइम डायरेक्टर, हिंदुस्तान जिंक।
सुरक्षा और तकनीक का संगम
महिलाओं के लिए कार्यस्थल को सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए कंपनी ने कई ठोस कदम उठाए हैं:
सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर : वी-सेफ ऐप (V-Safe App), सीसीटीवी सर्विलांस और बायोमेट्रिक एक्सेस।
सुविधाएं : महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और नाइट ट्रांसपोर्टेशन (रात में परिवहन) की सुविधा।
डिजिटल कंट्रोल : टेली-रिमोट माइनिंग और डिजिटल कंट्रोल रूम में महिलाओं की बढ़ती भूमिका।
हिंदुस्तान जिंक ने इससे पहले भी कई 'फर्स्ट' (Firsts) अपने नाम किए हैं, जिनमें भारत की पहली अंडरग्राउंड ऑल-वुमन माइन रेस्क्यू टीम का गठन भी शामिल है। ‘तेजस्विनी’ पहल के जरिए कंपनी ने साबित किया है कि मेटलर्जिकल ऑपरेशंस के जटिल कार्यों में भी महिलाएं नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
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