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'उनका दिल कभी देश के लिए नहीं धड़का', साध्वी ऋतंभरा ने सोनिया गांधी की आलोचना की

khaskhabar.com: सोमवार, 17 अगस्त 2026 5:38 PM (IST)
'उनका दिल कभी देश के लिए नहीं धड़का', साध्वी ऋतंभरा ने सोनिया गांधी की आलोचना की
मथुरा । पद्म भूषण ने सोमवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आलोचना की। यह आलोचना स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान हुई एक कथित घटना को लेकर की गई। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि यह घोर अपमान है। उनके दिल कभी भी सच में देश के लिए नहीं धड़के हैं। कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। इस वीडियो में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 'वंदे मातरम' गायन के समय आपस में बातचीत करते हुए दिखाई दिए। पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने आईएएनएस से ​​बातचीत में कहा, "सोनिया गांधी ने बहुत बड़ा अपमान किया है। जब 'वंदे मातरम' गाया जा रहा था, तो उनके हाव-भाव से साफ पता चल रहा था कि वह कितनी असहज और नाराज थीं। ये वे लोग हैं जो देश की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनके दिल कभी भी देश के लिए सच्चे मन से नहीं धड़के, फिर भी उन्हें देश की जनता पर थोपा गया है। पूरे देश और दुनिया ने यह दृश्य देखा है। उन्हें ऐसी बेचैनी तब दिखानी चाहिए थी जब उनका सामना किसी आतंकवादी से हो रहा हो।"
उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' सुनकर अनगिनत बलिदानों की यादें ताजा हो जाती हैं और हमारे दिलों में देश के लिए प्यार उमड़ने लगता है। यह वही 'वंदे मातरम' है जिसे देश की आजादी की लड़ाई लड़ने और बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने गाया था। लेकिन हम भी कितने अजीब लोग हैं... जो मानसिक गुलामी में जकड़े हुए हैं... जो हमारे दिलों और दिमागों पर कब्जा करना चाहते हैं... वे हमारे भारत से प्यार भी नहीं करते। उन्हें 'वंदे मातरम' से इतनी तकलीफ होती है। पूरी दुनिया ने यह देखा है। यह एक अक्षम्य अपराध है।"
इसके अलावा, जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि हमने पहले ही देखा है कि उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। वहां जिस तरह का खाना बांटा गया, लड़कियां जिस तरह के कपड़े पहने हुए थीं... भारत की धरती पर ऐसी बेशर्मी। यह क्या है? ऐसे लोगों को भारत का नेतृत्व करने का सपना भी नहीं देखना चाहिए।
साध्वी ने कहा कि मुद्दों पर विरोध करना लोकतंत्र की खूबसूरती है। जब सत्ता में बैठे लोग बात नहीं सुनते, तो लोगों को अपनी आवाज उठानी पड़ती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर आपका देश एक विशाल बरगद के पेड़ जैसा है और उसमें दीमक लग गई है, तो मांग पूरे पेड़ को गिराने की होनी चाहिए। मांग दीमक का इलाज करने की होनी चाहिए... 'दिमागी नक्सल' लोग कहते हैं कि अब फैसले सड़कों पर लिए जाएंगे। हम इस देश में कभी भी अराजकता नहीं होने दे सकते।
--आईएएनएस

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