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हरियाणा ने 2.1 गीगावाट सोलर क्षमता हासिल की, रूफटॉप इंस्टॉलेशन तेज़ी से बढ़ाया- अनिल विज

बैठक के दौरान विज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि गुरुग्राम में मुख्यालय वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस अब 120 से अधिक देशों को “वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड” के विज़न के साथ जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2025 तक भारत की 119 गीगावाट स्थापित सौर क्षमता भारत दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल करती है।
विज ने बताया कि राजस्थान के 2200 मेगावाट क्षमता वाले भादला सोलर पार्क और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना व पीएम-कुसुम जैसी प्रमुख योजनाओं ने सौर ऊर्जा को सस्ता और सुलभ बनाया है। विज ने कहा कि भारत ने 2030 तक 5 एमटीपीए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखते हुए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भी शुरू किया है। उन्होंने बताया कि “सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं है, यह भारत की सूर्य शक्ति है।
हरियाणा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य ने पहले ही 2.1 गीगावाट से अधिक सौर क्षमता स्थापित की है और रूफटॉप सौर को तेजी से बढ़ा रहा है। पीएम-कुसुम योजना के तहत 1.65 लाख सौर पंप किसानों को वितरित किए गए हैं। उल्लेखनीय परियोजनाओं में पानीपत में 10 मेवावाट का सौर संयंत्र, 448 मेगावाट ग्राउंड-माउंटेड प्रोजेक्ट्स, 13 स्वीकृत सोलर पार्क और पंचकूला को मॉडल सोलर सिटी घोषित करना शामिल है। जुलाई 2025 तक, हरियाणा की कुल नवीकरणीय क्षमता 6,264 मेवावाट तक पहुँच चुकी है, जो राज्य की कुल उत्पादन क्षमता का 38.6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य ने सरकारी स्कूलों व अस्पतालों पर रूफटॉप सौर स्थापित किए हैं, नेट मीटरिंग लागू की है, पराली से बायोमास प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया है। इन प्रयासों के लिए हरियाणा को ऊर्जा दक्षता और संरक्षण में उत्कृष्टता हेतु कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हरियाणा ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एनसीआर के निकट होने के कारण, राज्य ने 2030 तक 250 केटीपीए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और 2 गीगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता का लक्ष्य रखा है। कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, हरियाणा ने बायो-एनर्जी में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख टन धान की पराली पैदा करता है, जिसमें से लगभग 30 लाख टन अतिरिक्त है। इस संसाधन का उपयोग करने के लिए 17 सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं और 11 निर्माणाधीन हैं।
सुश्री मानो द्वारा 24×7 ऑफ-ग्रिड 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उपलब्ध कराने की पहल को “समयानुकूल और दूरदर्शी” बताते हुए श्री विज ने कहा कि यह पहल भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्यों और हरियाणा की अक्षय ऊर्जा रोडमैप के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार मिशन ज्ञान साझा करने, निवेश बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने का मंच बनेगा।
बैठक के उपरांत मीडिया से बातचीत में विज ने कहा कि वैश्विक प्रगति के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान आवश्यक है। उन्होंने फिलीपींस के 7641 द्वीपों पर स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन के अनूठे मॉडल का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि फिलीपींस हरियाणा में 1000 करोड़ रुपये का निवेश करे ताकि गाँव बाहरी बिजली आपूर्ति पर निर्भर न रहें।
इस अवसर पर सुश्री जेनी लिन ग्रानाडोस मानो ने ग्रीन एनर्जी, सोलर सिस्टम विस्तार, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरणीय सततता, इंटेलिजेंट माइक्रो ग्रिड्स, स्मार्ट यूटिलिटी नेटवर्क और डिजिटलीकरण पर प्रेज़ेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी “पीपल-प्लैनेट-पर्पस” के सिद्धांत पर कार्य करती है और ऊर्जा क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
डॉ. कबीर केवी, सीईओ, एएनपीएम और यूएई के एनबीएमसी के एंबेसडर ने मानवीय आधार पर भारत में निवेश का पूरा समर्थन जताया और ऊर्जा मंत्री को यूएई आने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, एचवीपीएनएल के एमडी जे. गणेशन, यूएचबीवीएन के एमडी अशोक मीणा तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी व प्रतिनिधिमंडल के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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