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उदयपुर में रिमझिम बारिश के बीच हरियाली अमावस्या मेला : सहेलियों की बाड़ी से फतहसागर तक उमड़ा जनसैलाब, कल सिर्फ महिलाओं का मेला

रिमझिम फुहारों के बीच उल्लास: दिनभर रुक-रुककर हुई हल्की बारिश और ठंडी हवाओं से तापमान में गिरावट आई, जिससे लोगों को उमस से राहत मिली और मेले का मजा दोगुना हो गया।
मनोरंजन व खान-पान: बच्चों और बड़ों ने चकरी, डोलर व विभिन्न झूलों का आनंद लिया। मेले में आए लोगों ने पारंपरिक मालपुए, घेवर, खस्ता पापड़ी, पकौड़ी और आइसक्रीम का स्वाद चखा। शाम होते-होते पूरा मेला परिसर खचाखच भर गया।
1899 से चली आ रही है अनूठी परंपरा; कल केवल महिलाओं का मेला
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस मेले की शुरुआत साल 1899 में महाराणा फतह सिंह के शासनकाल में हुई थी। अगले वर्ष चावणी रानी की पहल पर महिलाओं के लिए पृथक मेले की शुरुआत की गई। शुरुआती दौर में राजदरबार की ओर से मालपुए बनवाए जाने के कारण इसे 'मालपुए का मेला' भी कहा जाता था।
13 अगस्त (गुरुवार) को महिला मेला: मेले का दूसरा दिन (गुरुवार) पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। फतहसागर की पाल और सहेलियों की बाड़ी क्षेत्र में केवल महिलाओं को ही प्रवेश मिलेगा, जहाँ वे बेफिक्र होकर खरीदारी और घूमने का आनंद लेंगी।
पुलिस का कड़ा ट्रैफिक प्लान: जानें नो-व्हीकल जोन और पार्किंग व्यवस्था
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने 12 और 13 अगस्त को कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बंद रखी है तथा वैकल्पिक पार्किंग स्थल तय किए हैं:
नो-व्हीकल जोन (इन रास्तों पर गाड़ियों की एंट्री बंद):
पहाड़ी बस स्टैंड, फतहपुरा चौकी, अरावली वाटिका, देवाली तिराहा, आयुर्वेदिक चौराहा तथा शिक्षा भवन से सहेलियों की बाड़ी व फतहसागर जाने वाले मार्ग।
रानी रोड (वाया देवाली से फतहपुरा) और महाकालेश्वर से अंबावगढ़ मार्ग पर बसों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
निर्धारित पार्किंग स्थल:
चार पहिया वाहन: फतहपुरा की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए Field Club में पार्किंग की व्यवस्था है।
दोपहिया वाहन: फतहपुरा चौकी से सहेलियों की बाड़ी की तरफ दीवार के सहारे।
अन्य पार्किंग: लव-कुश स्टेडियम, स्वरूप सागर पाल, पंचवटी चौराहा, नीमच माता पार्किंग और सेलिब्रेशन मॉल के पास लिंक रोड।
बदले हुए रूट:
बड़ी और बड़गांव की ओर से आने-जाने वाले वाहनों को साइफन व देवाली नहर मार्ग से डायवर्ट किया गया है।
झाड़ोल की ओर से आने वाली रोडवेज बसें नया खेड़ा, कायड़ा हाईवे और पारस होकर संचालित होंगी।
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