Gurugram: 11 arrested for multi-crore cyber fraud targeting US citizens via fake call center-m.khaskhabar.com
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Sep 16, 2026 8:48 pm
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गुरुग्राम : फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की साइबर ठगी, 11 गिरफ्तार

khaskhabar.com: बुधवार, 02 सितम्बर 2026 08:13 AM (IST)
गुरुग्राम : फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की साइबर ठगी, 11 गिरफ्तार
गुरुग्राम। गुरुग्राम पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फर्जी कॉल सेंटर चलाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी एप्पल कस्टमर सर्विस के नाम पर अमेरिका (यूएसए) के नागरिकों को झांसा देकर उनसे लाखों डॉलर की ठगी कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, 2 हेडफोन-माइक, 2 कार, 1 बाइक और 1 स्कूटी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध पश्चिम थाना की टीम को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम के पालम विहार स्थित एक मकान में बिना अनुमति फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर 1 सितंबर को पुलिस ने प्लॉट नंबर 1208, जे-ब्लॉक, पालम विहार में छापेमारी की। मौके पर आरोपी लैपटॉप, मोबाइल फोन और हेडसेट की मदद से कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बातचीत करते मिले।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रितपाल सिंह, मोहम्मद रिजान अंसारी, चैतन्य गोयल, मनीष, शाहरुख अंसारी, संजीव पांडे, शिवम, आदित्य, दीपक त्रिवेदी, वरुण गौतम और नीरज के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ साइबर अपराध पश्चिम थाना में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि प्रितपाल सिंह कॉल सेंटर का टीम लीडर था। आरोपी पिछले दो से तीन महीनों से किराए के मकान में यह कॉल सेंटर चला रहे थे। प्रत्येक कॉलर को कमीशन के आधार पर रखा गया था, जबकि पूरे नेटवर्क का संचालन एक अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था।
जांच में पता चला कि आरोपी खुद को एप्पल कस्टमर सर्विस या संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे। वे लोगों को उनके मोबाइल फोन में वायरस या तकनीकी खराबी होने का डर दिखाते थे और उन्हें एक वर्चुअल टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने के लिए कहते थे। इसके बाद सॉफ्टवेयर और एप्पल फेसटाइम के माध्यम से पीड़ितों से बातचीत कर उनकी समस्या दूर करने के नाम पर उन्हें गुमराह किया जाता था।
आरोपी अमेरिकी नागरिकों को फेडरल ट्रेड कमीशन का फर्जी पत्र दिखाकर भय पैदा करते थे और समस्या का समाधान करने के नाम पर उनसे 10,000 से 20,000 अमेरिकी डॉलर तक की रकम ठग लेते थे। ठगी की यह राशि कॉल सेंटर संचालक द्वारा उपलब्ध कराए गए विदेशी बैंक खातों में जमा करवाई जाती थी। इसके अलावा गिफ्ट कार्ड और वाउचर नंबर हासिल करके भी धोखाधड़ी की जाती थी।
--आईएएनएस

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