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खुशियों के आंगन में पसरा मातम : पिता बनने की खुशी मनाने घर आए सेना के जवान की हादसे में मौत, 17 दिन के नवजात को छोड़, 3 साल के मासूम ने दी मुखाग्नि

एक पल के हादसे ने उजाड़ दीं खुशियां
29 मई की शाम सुनील किसी काम से अपनी बाइक लेकर निकले थे। रास्ते में अचानक बाइक स्लिप हो गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर में गहरी चोट लगने के कारण वे मौके पर ही लहूलुहान होकर अचेत हो गए। परिजनों ने उन्हें तुरंत झुंझुनूं के अस्पताल पहुंचाया, जहां से नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें जयपुर के मिलिट्री हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी देश के इस जांबाज को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा और सिसकता हुआ गांव
सोमवार को जब शहीद जवान का पार्थिव शरीर जयपुर से झुंझुनूं लाया गया, तो वहां से उनके गांव इंडाली तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। हजारों युवाओं की भीड़ 'भारत माता की जय' और 'सुनील कुमार अमर रहे' के नारे लगा रही थी। रास्ते भर लोगों ने नम आंखों से फूल बरसाकर अपने नायक को विदाई दी।
कलेजा चीर देने वाला दृश्य: पत्नी हुई बेसुध, मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि
जैसे ही तिरंगे में लिपटा सुनील का पार्थिव शरीर उनके घर की चौखट पर पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। बूढ़ी मां कमला देवी, पिता रघुवीर सिंह और बड़े भाई अनिल कुमार फूट-फूटकर रो पड़े। सबसे मार्मिक दृश्य तब था जब सुनील की पत्नी रिंकू देवी अपनी गोद में महज 17 दिन के नवजात शिशु को थामे पति के अंतिम दर्शन करने आईं। पति का बेजान चेहरा देखते ही वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। इसके बाद सेना के जवानों ने सुनील के तीन साल के मासूम बेटे युवराज को तिरंगा सौंपा। सैन्य सम्मान और 'गार्ड ऑफ ऑनर' के बीच, उसी तीन साल के अबोध बच्चे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर सैनिक और ग्रामीण का कलेजा मुंह को आ गया।
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