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सरकारी संस्थानों को मजबूत करने के बजाय रिक्त पदों और ठेका व्यवस्था के सहारे काम चला रही सरकार : सैलजा

khaskhabar.com: मंगलवार, 18 अगस्त 2026 3:11 PM (IST)
सरकारी संस्थानों को मजबूत करने के बजाय रिक्त पदों और ठेका व्यवस्था के सहारे काम चला रही सरकार : सैलजा
सिरसा। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार प्रदेश की सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के बजाय लगातार कमजोर कर रही है। सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं, सरकारी अस्पताल चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि शहरों में सफाई, सीवर और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनता परेशान है। सरकार स्मार्ट सिटी और आधुनिक हरियाणा के दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर आम नागरिक को आवश्यक सरकारी सेवाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक एवं प्रधानाचार्य/हेडमास्टर के 1,16,331 स्वीकृत पदों में से केवल 91,554 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। नियमित रिक्तियों की संख्या 24,777 है और इनमें से 6,237 पदों पर एचकेआरएन के माध्यम से व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद 18,540 पदों का अंतर बना हुआ है। यह स्थिति सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। सांसद ने कहा कि सबसे गंभीर स्थिति टीजीटी/ईएसएचएम वर्ग में सामने आ रही है, जहां 8,126 पदों की नेट कमी बताई गई है। पीजीटी में भी 6,016 पदों का अंतर है, जबकि जेबीटी/पीआरटी में 3,051 पद खाली बताए गए हैं। प्रधानाचार्य और हेडमास्टर के स्तर पर भी 1,347 पद रिक्त हैं। रेशनलाइजेशन के बाद भी यदि इतने बड़े पैमाने पर पद खाली हैं तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पर्याप्त शिक्षकों के बिना सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
कुमारी सैलजा ने कहा कि समस्या केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग एवं सहायक स्टाफ की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। मरीजों को जांच और उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसी बुनियादी जिम्मेदारियां हैं जिनसे सरकार पीछे नहीं हट सकती।
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश के अनेक शहरों में सफाई व्यवस्था, सीवर और पेयजल को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर, जाम सीवर और दूषित अथवा अपर्याप्त पेयजल जैसी समस्याओं से लोग परेशान हैं। सरकार को कर्मचारियों की जायज समस्याओं का बातचीत से समाधान करते हुए नगर निकायों की व्यवस्था को सुचारू करना चाहिए। आवश्यक सेवाओं को लंबे समय तक प्रभावित रहने देना न कर्मचारियों के हित में है और न ही जनता के।
कुमारी सैलजा ने कहा कि एचकेआरएन, आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था को स्थायी सरकारी भर्ती का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। जहां स्थायी प्रकृति का काम है वहां नियमानुसार पारदर्शी भर्ती करके स्वीकृत पदों को भरा जाना चाहिए। सरकारी संस्थानों में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराना और उन्हें संसाधन देना सरकार की जिम्मेदारी है। रिक्त पदों को वर्षों तक न भरने से सरकारी संस्थाएं कमजोर होती हैं और अंततः जनता की निर्भरता निजी सेवाओं पर बढ़ती जाती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति स्पष्ट है कि सरकारी शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं को मजबूत, सुलभ और जवाबदेह बनाया जाए। सरकार निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाने के नाम पर सरकारी व्यवस्था को कमजोर न करे। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए मजबूत सरकारी स्कूल, अस्पताल और नगर सेवाएं सामाजिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।
कुमारी सैलजा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग सहित आवश्यक सेवाओं में रिक्त पदों को भरने के लिए समयबद्ध भर्ती कार्यक्रम घोषित किया जाए, नगर निकायों की सफाई, सीवर और पेयजल व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए तथा एचकेआरएन और अस्थायी व्यवस्था के भरोसे स्थायी पदों को लंबे समय तक खाली रखने की नीति पर पुनर्विचार किया जाए। सांसद ने कहा कि विकास का वास्तविक पैमाना केवल घोषणाएं और बड़ी परियोजनाएं नहीं, बल्कि आम नागरिक को मिलने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता है।

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