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जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, सुबह 5 बजे ACB का धावा, भ्रष्टाचार पर राजस्थान में हड़कंप

जेल से छूटे थे, अब फिर शिकंजे में
गौरतलब है कि महेश जोशी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इससे पहले इसी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के तहत अप्रैल-2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें अरेस्ट किया था। करीब 7 महीने जेल की सलाखें काटने के बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन एसीबी की इस ताजा कार्रवाई ने उन्हें फिर से सलाखों के पीछे धकेल दिया है।
900 करोड़ का खेल: फर्जी सर्टिफिकेट और भारी रिश्वत
जांच में खुलासा हुआ है कि केंद्र सरकार की 'हर घर नल' योजना में जमकर सेंधमारी की गई। श्री श्याम और श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों के टेंडर हथियाए थे।
फर्जीवाड़ा: श्री गणपति कंपनी ने 859.2 करोड़ और श्री श्याम कंपनी ने 120.25 करोड़ के टेंडर गलत तरीके से हासिल किए।
अधिकारियों पर गाज: इस मामले में अब तक पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित 22 अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। 10 आरोपी पहले ही दबोचे जा चुके हैं।
ईमेल आईडी से खुला भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा
एसीबी को जांच के दौरान एक ईमेल आईडी से बड़े सुराग मिले थे, जिसके बाद एक-एक कर कड़ियां जुड़ती गईं और भ्रष्टाचार की परतें उधड़ती चली गईं। पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अगला नंबर पूर्व मंत्री का ही है। आज की इस गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि जेजेएम घोटाले की आंच अब सत्ता के सबसे ऊंचे गलियारों तक पहुँच चुकी है।
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