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दो साल में 73 लाख किसानों का योजना से बाहर होना सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल : सैलजा

कुमारी सैलजा ने कहा कि सामान्य बीमा व्यवस्था में किसी व्यक्ति की संपत्ति का बीमा किया जाता है तो उसे उसकी पॉलिसी और बीमा की शर्तों की स्पष्ट जानकारी दी जाती है। फसल बीमा में भी प्रत्येक किसान को समय पर उसकी पॉलिसी की प्रति, बीमित खेत और फसल का पूरा विवरण, बीमित राशि, प्रीमियम तथा दावा तय करने की शर्तें स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केंद्र सरकार का आधिकारिक फसल बीमा पोर्टल भी किसान को पॉलिसी स्टेटस देखने की सुविधा देता है।
सैटेलाइट सर्वे और मौके की जांच के जरिए वास्तविक नुकसान को प्राथमिकता मिले
कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि एक किसान के खेत में 80 या 100 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है तो केवल उस क्षेत्र की औसत उपज के आधार पर उसका दावा कम करना किसान के साथ न्याय नहीं है। कई बार एक ही गांव में एक खेत को अत्यधिक नुकसान होता है, जबकि दूसरे खेत में नुकसान कम होता है। इसलिए सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिसमें तकनीक, सैटेलाइट सर्वे और मौके की जांच के जरिए वास्तविक नुकसान को प्राथमिकता मिले।
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को बीमा कंपनियों के हितों से अधिक किसानों के हितों की चिंता करनी चाहिए। किसान से प्रीमियम समय पर लिया जाता है तो नुकसान के बाद सर्वे और मुआवजा भी समय पर मिलना चाहिए। किसान को यह पता होना चाहिए कि उसके खेत का कितना बीमा हुआ, नुकसान का आकलन किस आधार पर किया गया और दावा कम या अस्वीकार किया गया तो उसका स्पष्ट कारण क्या है।
उचित मुआवजा मिलना ही सच्चा किसान हित
सांसद ने मांग की कि केंद्र और प्रदेश सरकार फसल बीमा व्यवस्था की समीक्षा करे, प्रत्येक किसान को बीमा पॉलिसी की प्रति अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए, नुकसान के सर्वे में किसान की भागीदारी सुनिश्चित करे तथा वास्तविक खेत-स्तरीय नुकसान को अधिक महत्व देने वाली पारदर्शी दावा प्रणाली बनाए। फसल बीमा किसान की सुरक्षा का साधन होना चाहिए, बीमा कंपनियों के लाभ का माध्यम नहीं। किसान ने जितना वास्तविक नुकसान झेला है, उसे समय पर उसके अनुरूप मुआवजा मिलना ही सच्चा किसान हित है।
गरीब की थाली से चीनी-प्याज दूर करने में जुटी सरकार : सैलजा
कुमारी सैलजा ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। चीनी, प्याज और रोजमर्रा की सब्जियों के दाम बढ़ने से आम परिवार का रसोई बजट लगातार बिगड़ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि सरकार गरीब की थाली से चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों को भी दूर करने में जुटी हुई है। महंगाई को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उस परिवार की रसोई से देखा जाना चाहिए जिसे सीमित आमदनी में घर चलाना पड़ता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेशा आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा के साथ किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की रही है। महंगाई नियंत्रित करने का अर्थ किसान को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए। सरकार ऐसी संतुलित नीति बनाए जिसमें किसान को प्याज, सब्जियों और दूसरी फसलों का लाभकारी मूल्य मिले तथा जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर सख्ती करके उपभोक्ता को उचित दाम पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान की जेब भी सुरक्षित रहे और गरीब की थाली भी।
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