Exit of 7.3 million farmers from the scheme in two years raises serious questions about government policies: Selja-m.khaskhabar.com
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दो साल में 73 लाख किसानों का योजना से बाहर होना सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल : सैलजा

khaskhabar.com: सोमवार, 24 अगस्त 2026 3:37 PM (IST)
दो साल में 73 लाख किसानों का योजना से बाहर होना सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल : सैलजा
सिरसा। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। किसान अपनी मेहनत की कमाई से बीमा प्रीमियम जमा करता है, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा से उसकी फसल बर्बाद होती है तो उसे कभी सर्वे, कभी क्षेत्र की औसत उपज और कभी तकनीकी नियमों के नाम पर अपने ही हक के लिए भटकना पड़ता है। दो साल में करीब 73 लाख किसानों का फसल बीमा योजना से बाहर होना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था के प्रति किसानों का भरोसा कमजोर हुआ है। कुमारी सैलजा ने कहा कि फसल बीमा का मूल उद्देश्य किसान को प्राकृतिक आपदा से हुए आर्थिक नुकसान से सुरक्षा देना है, लेकिन जब वास्तविक नुकसान और मिलने वाले मुआवजे में भारी अंतर हो तो योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि किसान की बर्बाद फसल को केवल फाइलों, आंकड़ों और औसत उपज के गणित से नहीं तौला जा सकता। जिस किसान का जितना वास्तविक नुकसान हुआ है, उसे उसी अनुपात में समयबद्ध मुआवजा मिलना चाहिए। सांसद ने कहा कि सरकार और बीमा कंपनियों को एक बुनियादी सवाल का जवाब देना चाहिए कि जब बीमा किसान द्वारा बोए गए निश्चित क्षेत्र और फसल के आधार पर किया जाता है तथा बीमित राशि भी क्षेत्रफल के आधार पर तय होती है, तो नुकसान होने पर व्यक्तिगत खेत की वास्तविक स्थिति को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया जाता? प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक एफएक्यू के अनुसार भी व्यक्तिगत किसान की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर निर्धारित राशि और उसकी बीमित फसल के क्षेत्रफल के आधार पर तय होती है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सामान्य बीमा व्यवस्था में किसी व्यक्ति की संपत्ति का बीमा किया जाता है तो उसे उसकी पॉलिसी और बीमा की शर्तों की स्पष्ट जानकारी दी जाती है। फसल बीमा में भी प्रत्येक किसान को समय पर उसकी पॉलिसी की प्रति, बीमित खेत और फसल का पूरा विवरण, बीमित राशि, प्रीमियम तथा दावा तय करने की शर्तें स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केंद्र सरकार का आधिकारिक फसल बीमा पोर्टल भी किसान को पॉलिसी स्टेटस देखने की सुविधा देता है।

सैटेलाइट सर्वे और मौके की जांच के जरिए वास्तविक नुकसान को प्राथमिकता मिले
कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि एक किसान के खेत में 80 या 100 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है तो केवल उस क्षेत्र की औसत उपज के आधार पर उसका दावा कम करना किसान के साथ न्याय नहीं है। कई बार एक ही गांव में एक खेत को अत्यधिक नुकसान होता है, जबकि दूसरे खेत में नुकसान कम होता है। इसलिए सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिसमें तकनीक, सैटेलाइट सर्वे और मौके की जांच के जरिए वास्तविक नुकसान को प्राथमिकता मिले।
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को बीमा कंपनियों के हितों से अधिक किसानों के हितों की चिंता करनी चाहिए। किसान से प्रीमियम समय पर लिया जाता है तो नुकसान के बाद सर्वे और मुआवजा भी समय पर मिलना चाहिए। किसान को यह पता होना चाहिए कि उसके खेत का कितना बीमा हुआ, नुकसान का आकलन किस आधार पर किया गया और दावा कम या अस्वीकार किया गया तो उसका स्पष्ट कारण क्या है।
उचित मुआवजा मिलना ही सच्चा किसान हित
सांसद ने मांग की कि केंद्र और प्रदेश सरकार फसल बीमा व्यवस्था की समीक्षा करे, प्रत्येक किसान को बीमा पॉलिसी की प्रति अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए, नुकसान के सर्वे में किसान की भागीदारी सुनिश्चित करे तथा वास्तविक खेत-स्तरीय नुकसान को अधिक महत्व देने वाली पारदर्शी दावा प्रणाली बनाए। फसल बीमा किसान की सुरक्षा का साधन होना चाहिए, बीमा कंपनियों के लाभ का माध्यम नहीं। किसान ने जितना वास्तविक नुकसान झेला है, उसे समय पर उसके अनुरूप मुआवजा मिलना ही सच्चा किसान हित है।
गरीब की थाली से चीनी-प्याज दूर करने में जुटी सरकार : सैलजा
कुमारी सैलजा ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। चीनी, प्याज और रोजमर्रा की सब्जियों के दाम बढ़ने से आम परिवार का रसोई बजट लगातार बिगड़ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि सरकार गरीब की थाली से चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों को भी दूर करने में जुटी हुई है। महंगाई को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उस परिवार की रसोई से देखा जाना चाहिए जिसे सीमित आमदनी में घर चलाना पड़ता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेशा आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा के साथ किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की रही है। महंगाई नियंत्रित करने का अर्थ किसान को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए। सरकार ऐसी संतुलित नीति बनाए जिसमें किसान को प्याज, सब्जियों और दूसरी फसलों का लाभकारी मूल्य मिले तथा जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर सख्ती करके उपभोक्ता को उचित दाम पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान की जेब भी सुरक्षित रहे और गरीब की थाली भी।

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