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तीन कर्मियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले से कर्मचारी लामबंद

khaskhabar.com : मंगलवार, 01 अगस्त 2017 5:06 PM (IST)
तीन कर्मियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले से कर्मचारी लामबंद
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के अंग्रेजों के समय के लागू हिटलरी निर्णय के तीन कर्मचारी शिकार हुए है। कर्मचारियों के स्क्रीनिंग कर की जा रही करवाई की चपेट में विकास भवन का एक व कलेक्ट्रट के दो लिपिक आये है। इन तीनों को अयोग्य घोषित कर अनिवार्य सेवानिवृति दे दी गई है।



ये करवाई के बाद कर्मचारी संघ लामबंद हो गए है। प्रदेश के नेताओं जो इसकी सूचना भेज दी गई है,और आगे के आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है।इस पर अब प्रदेश स्तर पर आंदोलन प्रारम्भ होना निश्चित बताया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट कर्मियों को एडीएम की तथा विकास विभाग के कर्मी को सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अयोग्य घोषित करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। इस करवाई पर लामबंद हुए कर्मचारी नेता अधिकारियों पर बदले की भावना से करवाई का आरोप लगाते हुए आन्दोलन की चेतावनी दे रहे हैं। उधर इसकी जद में आये कर्मचारी कोर्ट में भी चुनौती देने की बात कह रहै है।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए गए कलेक्ट्रेट के कर्मी बिना सक्सेना तहसील सदर में व दिनेश कुमार तहसील पूरनपुर में लिपिक रस्केंद्र प्रकाश विकास विभाग में तैनात है।सीडीओ इन्द्र देव द्विवेदी की स्क्रीनिंग के लिए प्रत्येक विभाग में बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी ने कर्मचारियों के अभिलेखों का परीक्षण किया। जिसके बाद करवाई करते हुए तीनों कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। 56 वर्षीय रस्केन्द्र प्रकाश 31 वर्षों से पीलीभीत में ही विकास भवन में तैनात थे। वे पिछले सात महीनों से बिलसण्डा ब्लाक में फर्जी ग्राम पंचायत अधिकारी की नियुक्ति के मामले में निलंबित चल रहे थे। यह फैसला सीडीओ ने उस दिन किया जिस दिन उन्हें खुद सेवानिवृत्त होना था। जिसके चलते उनके निर्णय पर सवाल खड़े होने लगे।


आरोपी लिपिक रस्केन्द्र की मानें तो उसकी लगातार 10 वर्षों से सेवा पुस्तिका में उत्कृष्ट सेवायें दर्ज है। साथ ही सवाल खड़े करते हुए आरोपी लिपिक ने कहा कि वह पिछले सात महीने से निलंबित है। निलम्बन पर चल रही जाँच का भी कोई फैसला अभी तक नहीं आया है। ऐसे में सीडीओ की कार्रवाई असंवैधानिक है।
राज्य कर्मचारी सन्युक्त परिषद पीलीभीत के अध्यक्ष अरविंद सक्सेना ने कहा कि भारत स्वतंत्र है और अब अंग्रेजों के समय के गुलामी वाले निर्णय कदापि स्वीकार नहीं किये जायेंगे। तीनों कर्मियों की अनिवार्य सेवा निवृति के निर्णय को परी तरह से अनधिकृत बताया है। उन्होंने कहा कि फैसले के खिलाफ सभी कर्मचारी संगठन एकजुट है। संयुक्त परिषद व महासंघ के कर्मचारी नेताओं ने अनिवार्य सेवा निवृति के निर्णय को बदले की भावना से लिया गया बताया है।


उन्होंने कहा कि परिषद के प्रंतीय नेताओं ने योगी सरकार के अंग्रेजों के समय वाले इस हिटलरी आदेश को पूर्व में ही चुनौती दे दी थी।कहा गया था कि सरकार की करवाई पर आंदोलन प्रारम्भ किया जाएगा। नेता अरविंद सक्सेना ने बताया कि यहां कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृति की सूचना प्रदेश के नेताओं को दे दी गई है।उन्होंने कहा कि प्रत्येक दशा में कर्मचारी उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं होगा और शीघ्र ही पूरे प्रान्त में प्रभावी आंदोलन छेड़ा जाएगा। जिससे योगी सरकार के मनमाने हिटलरी निर्णयों पर अंकुश लग सके। इस सम्बंध में प्रभावित कर्मियों ने न्यायालय की शरण में जाने की बात कही है।

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