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टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़े के मामले में ईडी की कार्रवाई, 14 जगहों पर छापेमारी

एनएचएआई से मिले रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच में भी ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। छापेमारी का मकसद डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना, इसमें शामिल लोगों की पहचान करना और अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाना है। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
एक अन्य मामले में ईडी ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग केस में करीब 3.31 करोड़ रुपए की चल संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य से जुड़े केस में की गई है। इसमें एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स को अटैच किया गया है।
बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 1 सितंबर को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था। यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो, बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें अक्षता मिनरल्स, उसके डायरेक्टर्स और अन्य पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप है।
मंगलवार को ही ईडी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक केके चंद्रवंशी उर्फ केके चंद्राकर के घर पर भी छापेमारी की थी। यह तलाशी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी के 5 से 8 अधिकारियों की टीम सुबह करीब 6 बजे दो गाड़ियों में दुर्ग जिले के पुराने भिलाई इलाके में स्थित चंद्रवंशी के घर पहुंची थी। अधिकारियों ने घर में दस्तावेजों की जांच की, जबकि बाहर सुरक्षा बल तैनात रहे।
--आईएएनएस
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