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फर्जी सीएलयू घोटाले में ईडी का एक्शन, अजय सहगल पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस

जांच से पता चला कि जीएमएडीए को वर्ष 2020 से ही जाली सहमति पत्रों के उपयोग के संबंध में शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उन्हें अवैध रूप से प्राप्त अनुमोदन वाली परियोजना में आवासीय और वाणिज्यिक इकाइयों को बेचकर अपराध की आय अर्जित करने की अनुमति मिल गई। इसके बजाय, एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड को आरईआरए अधिनियम की धारा 14 के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मूल अनुमोदित परियोजना के लेआउट को बदलकर 14.59 एकड़ का सीएलयू फिर से आवंटित कर दिया गया। इसके बाद भी, पंजाब क्षेत्रीय और नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 85 के तहत केवल आंशिक सीएलयू रद्द किया गया, जिससे आरोपी व्यक्ति को अपराध की आय अर्जित करने की अनुमति मिल गई, जिसकी जांच चल रही है।
इससे पहले, ईडी ने मई और जून 2026 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपी व्यक्तियों से जुड़े कई परिसरों और लॉकरों पर तलाशी ली थी। तलाशी के परिणामस्वरूप, आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 30.98 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई।
जांच के दौरान यह पता चला कि अजय सहगल अपराध की आय को उत्पन्न करने और छिपाने का मुख्य सूत्रधार था और उसने मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया था। परिणामस्वरूप, अजय सहगल को 22 मई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था।
ईडी की जांच में अपराध से प्राप्त आय लगभग 348 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 212.58 करोड़ रुपये की बिक्री और 135.41 करोड़ रुपये का बिना बिका माल शामिल है।
जांच में यह स्थापित हो गया है कि आरोपी व्यक्ति ने जानबूझकर अपराध से प्राप्त आय को अर्जित किया, अपने पास रखा, छुपाया और उसका उपयोग किया, जो फर्जी सहमति पत्रों, अवैध अनुमोदन और आरईआरए अधिनियम के तहत धोखाधड़ीपूर्ण पंजीकरण के आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन प्राप्त करने के अनुसूचित अपराध से उत्पन्न हुई है। आगे की जांच जारी है।
--आईएएनएस
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