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सरकारी आदेशों की अनदेखी पड़ी भारी, एटा के डीपीआरओ मोहम्मद राशिद सस्पेंड

सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद राशिद ने न सिर्फ समय पर जानकारी नहीं दी, बल्कि संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाए। इसे उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और सरकारी कार्यों के प्रति उदासीनता माना गया। इसी के चलते पंचायती राज विभाग के निदेशक की संस्तुति पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
नियमों के तहत, उन्हें उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इस जांच के लिए संयुक्त निदेशक संजय कुमार बरनवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
निलंबन के दौरान मोहम्मद राशिद को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, जो आमतौर पर आधे वेतन के बराबर होता है। इसके अलावा कुछ भत्ते भी शर्तों के आधार पर दिए जाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें यह प्रमाण देना होगा कि वह किसी अन्य नौकरी या व्यवसाय में शामिल नहीं हैं।
निलंबन अवधि में उन्हें पंचायती राज निदेशालय से संबद्ध रखा गया है।
इसी बीच प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एटा के एसडीएम पीयूष रावत को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि कामकाज प्रभावित न हो।
--आईएएनएस
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