Dausa Municipal Council Chairperson Election : Kavita Gurjar (BJP) vs. Rekha Gurjar Congress-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Oct 16, 2026 8:33 pm
Location
 
   राजस्थान और हरियाणा सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

दौसा में सभापति चुनाव : भाजपा से कविता गुर्जर और कांग्रेस से रेखा गुर्जर आमने-सामने, भाजपा में बगावत, 14 निर्दलीय तय करेंगे ताज

khaskhabar.com: बुधवार, 16 सितम्बर 2026 3:57 PM (IST)
दौसा में सभापति चुनाव : भाजपा से कविता गुर्जर और कांग्रेस से रेखा गुर्जर आमने-सामने, भाजपा में बगावत, 14 निर्दलीय तय करेंगे ताज
दौसा। दौसा नगर परिषद में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिला के लिए आरक्षित सभापति की कुर्सी को लेकर चुनावी मुकाबला बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय होने के आसार बन गए हैं। नामांकन के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस—दोनों ही प्रमुख दलों ने गुर्जर समाज की महिला पार्षदों पर दांव खेला है। भाजपा ने वार्ड 6 से पार्षद कविता गुर्जर को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस ने वार्ड 54 से पार्षद रेखा गुर्जर को मैदान में उतारा है। इस बीच भाजपा के आधिकारिक फैसले के खिलाफ पार्टी की ही एक अन्य पार्षद राधा जायसवाल ने निर्दलीय पर्चा दाखिल कर संगठन में बगावत के सुर छेड़ दिए हैं, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह उलझ गया है। भाजपा में बगावत: राधा जायसवाल ने भी ठोकी ताल
पार्टी द्वारा कविता गुर्जर के नाम पर मुहर लगाने और उनका नामांकन दाखिल होने के कुछ ही देर बाद वार्ड 15 से भाजपा पार्षद राधा जायसवाल भी सभापति पद के लिए नामांकन करने पहुंच गईं।
मजबूत सियासी पृष्ठभूमि: राधा जायसवाल पूर्व सभापति राजकुमार जायसवाल की पत्नी हैं, जो स्वयं दो बार नगर परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं।
मुकाबला हुआ पेचीदा: भाजपा की ही सिटिंग पार्षद के मैदान में उतरने से पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी का खतरा बढ़ गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जायसवाल परिवार का व्यक्तिगत रसूख निर्दलीयों और असंतुष्ट पार्षदों को लामबंद कर सकता है।
संख्याबल का गणित: 14 निर्दलीय पार्षद बने 'किंगमेकर'
55 वार्डों वाली दौसा नगर परिषद में किसी भी दल के पास अपने बूते स्पष्ट बहुमत (28 पार्षदों का जादुई आंकड़ा) नहीं है:
पार्षदों की दलीय स्थिति: कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि भाजपा के खाते में 17 सीटें आई हैं।
निर्दलीयों का दबदबा: कुल 14 निर्दलीय पार्षद जीतकर आए हैं।
सियासी समीकरण: कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए महज 4 अतिरिक्त मतों की दरकार है, जबकि भाजपा को कुर्सी तक पहुंचने के लिए कम से कम 11 निर्दलीयों के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग का सहारा लेना पड़ेगा।
दोनों ही दल अपने-अपने खेमों को एकजुट रखने और सेंधमारी से बचाने के लिए रणनीति बना रहे हैं। नाम वापसी की मियाद तक यदि भाजपा राधा जायसवाल को मनाने में नाकाम रहती है, तो 14 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग ही दौसा के नए सभापति का फैसला करेगी।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement
Advertisement