Crisis in Free Treatment at Rajasthan Largest Hospital SMS : Over 200 Life-Saving Medicines Out of Stock-m.khaskhabar.com
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राजस्थान के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल में लाइफ सेविंग दवाएं आउट ऑफ स्टॉक, दर-दर भटक रहे मरीज

khaskhabar.com: बुधवार, 08 जुलाई 2026 1:54 PM (IST)
राजस्थान के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल में लाइफ सेविंग दवाएं आउट ऑफ स्टॉक, दर-दर भटक रहे मरीज
जयपुर। राजस्थान के चिकित्सा और स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। 'मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना' के तहत मुफ्त इलाज का दावा करने वाले इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से सामान्य बुखार से लेकर कैंसर, हार्ट और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की 200 से अधिक जीवनरक्षक दवाएं और इंजेक्शन पूरी तरह से खत्म (नॉट अवेलेबल) हैं। दूर-दराज के जिलों और गांवों से अपनी जमापूंजी लगाकर जयपुर आने वाले सैकड़ों गरीब मरीज घंटों कतारों में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ या आधी-अधूरी दवाइयां लेकर लौटने को मजबूर हैं। कागजों में 'निशुल्क' व्यवस्था, हकीकत में 5-5 घंटे की अंतहीन कतारें
अस्पताल की पड़ताल में सामने आया कि मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक सिर्फ दौड़ाया जा रहा है और कोई भी स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है:
घंटों का इंतजार, फिर निराशा: चूरू से आए अर्थराइटिस के मरीज भरतराज और दूदू से आए किशनलाल जैसे सैकड़ों पीड़ितों को डॉक्टरों को दिखाने के बाद दवा काउंटरों पर 2 से 5 घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है।
दवा देने के बजाय 'तारीख पर तारीख': जब मरीजों का नंबर आता है, तो उन्हें बताया जाता है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई 5 दवाओं में से 3 गायब हैं। अंत में मरीजों को पर्चे की फोटोकॉपी जमा कर 3 से 4 दिन बाद 'लोकल परचेज' के भरोसे आने को कह दिया जाता है।
अस्पताल प्रशासन की मनमानी: किशनलाल नामक मरीज ने बताया कि जब दवा उपलब्ध न होने पर उन्होंने काउंटर संचालक से पर्ची पर 'नॉट अवेलेबल' का ठप्पा लगाने को कहा (ताकि वे डॉक्टर से दूसरी दवा लिखवा सकें), तो काउंटर संचालक ने ठप्पा लगाने से साफ इनकार कर दिया।
इन गंभीर बीमारियों की दवाइयां स्टॉक से गायब : देखें पूरी लिस्ट
अस्पताल की मुख्य सप्लाई चेन में 1 जुलाई से लगभग 206 दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा संकट हार्ट और शुगर के मरीजों पर मंडरा रहा है:
हार्ट और बीपी की दवाएं: इमरजेंसी की स्थिति में काम आने वाले महत्वपूर्ण इंजेक्शन जैसे Digoxin, Urokinase, Enoxaparin के साथ-साथ Ticagrelor, Ranolazine, Nicorandil, Apixaban, Nicoumalone और Warfarin जैसी जीवनरक्षक दवाएं पूरी तरह शॉर्ट हैं।
डायबिटीज (इंसुलिन): ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए बेहद जरूरी इंसुलिन के कई वेरिएंट्स (Biphasic Isophane Insulin, Insulin Injection, Insulin Detemir, Insulin Aspart) मरीजों को नहीं मिल पा रहे हैं।
अन्य शॉर्टेज: मौसमी बीमारियों के इस दौर में बैक्टीरियल, वायरल और फंगल संक्रमण रोधी दवाएं, पेनकिलर, सूजन कम करने की दवाएं, मिर्गी और आंखों के ग्लूकोमा की दवाएं भी गायब हैं। यहाँ तक कि सर्जरी और टांके लगाने में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण सर्जिकल आइटम्स और एनेस्थीसिया की भी भारी कमी है।
कांवटिया और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का भी यही हाल
दवाइयों का यह अकाल सिर्फ एसएमएस अस्पताल तक सीमित नहीं है। राजधानी जयपुर के शास्त्री नगर स्थित कांवटिया हॉस्पिटल में भी इस वक्त 100 से अधिक दवाएं काउंटर से नदारद हैं। वहीं स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को दूसरे कड़े और महंगे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन की दलील: "मरीज डॉक्टर से दूसरी दवा लिखवा लें"
इस पूरे संकट पर जब एसएमएस अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जगदीश मोदी मीडिया के समक्ष माना कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) की ओर से कुछ दवाओं की अनुपलब्धता बनी हुई है।
प्रशासन का तर्क : डॉ. मोदी ने कहा, "इन दवाओं के हमारे पास कई अन्य विकल्प मौजूद हैं। अगर कोई दवा काउंटर पर नहीं मिल रही है, तो मरीज दोबारा डॉक्टर से संपर्क कर कोई दूसरी वैकल्पिक दवा लिखवा सकता है। कई बार 'लोकल परचेज' (स्थानीय स्तर पर खरीद) में सप्लायरों की देरी की वजह से मरीजों को थोड़ी असुविधा हो जाती है, जिसे जल्द ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है।"
बड़ा सवाल : अस्पताल प्रशासन का यह तर्क उन गरीब मरीजों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जो व्हीलचेयर या गंभीर बीमारी की हालत में पहले ही 5 घंटे कतारों में बिता चुके हैं। सवाल यह है कि एक बीमार व्यक्ति बार-बार कतारें बदलने और नॉट अवेलेबल का ठप्पा लगवाने के प्रशासनिक फेर में आखिर कब तक पिसता रहेगा?

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